शहीद दिवस: 19 दिसंबर को दी गई थी काकोरी ट्रेन एक्शन के अमर नायकों को फांसी

राष्ट्रीय आंदोलन के क्रांतिकारी उफान के बाद हुए विख्यात काकोरी ट्रेन एक्शन देश के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। इस एक्शन के बाद न केवल शाहजहांपुर जनपद का नाम विश्व में छाया बल्कि शहीद नगरी के उपनाम से विख्यात हो गया। 19 दिसंबर 1927 को ब्रिटिश हुकूमत की जड़ों को हिलाने वाले काकोरी एक्शन केस के अमर नायकों को 19 दिसंबर को फांसी की सजा दी गई थी। बलिदानियों की अमर गाथा ने आजादी के आंदोलन को तेज गति प्रदान की थी। इतिहासकार डॉ. विकास खुराना बताते हैं कि महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से उपजी निराशा के परिणामस्वरूप कई स्वतंत्रता सेनानी सशस्त्र क्रांति की ओर उन्मुख हुए थे। इसका नेतृत्व शाहजहांपुर के पं. राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, ठाकुर रोशन सिंह ने किया था। पं. रामप्रसाद ने बंगाल के क्रांतिकारी नेता शचींद्र सान्याल के साथ मिलकर हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की नींव रखी। शस्त्रों को जुटाने के लिए धन की व्यवस्था करनी थी। इसके लिए 9 अगस्त 1925 को 8 डाउन लखनऊ-सहारनपुर ट्रेन को काकोरी के पास रोककर उसमें जा रहे सरकारी खजाने को लूट लिया था। इसी कांड के बाद तीनों क्रांतिकारियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी। 19 दिसंबर को प्रत्येक वर्ष शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। शहीद अशफाक उल्ला की मजार व अमर नायकों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर नमन किया जाता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 19, 2025, 08:18 IST
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