Yoga Day 2022: गोरखपुर में जन्मे परमहंस योगानंद ने विश्व में किया योग का प्रचार, अमेरिका में बजा था डंका

गोरखपुर शहर के कोतवाली क्षेत्र के मुफ्तीपुर में जन्मे परमहंस योगानंद (मुकुंद लाल घोष) ने अपने अनुयायियों को क्रिया योग का उपदेश दिया और पूरे विश्व में उसका प्रचार-प्रसार किया। योगानंद के अनुसार, क्रिया योग ईश्वर से साक्षात्कार की एक प्रभावी विधि है, इससे अपने जीवन को संवारा और ईश्वर की ओर अग्रसर हुआ जा सकता है। परमहंस योगानंद का जन्म शहर के कोतवाली क्षेत्र के मुफ्तीपुर में पांच जनवरी 1893 को हुआ था। यहीं पर उनके पिता भगवती चरण घोष सपरिवार किराए के मकान में रहते थे। मुकुंद लाल आठ भाई-बहनों में चौथे नंबर पर थे। उनके पिता ने ही उस समय सरकारी कार्यों में आपूर्ति व ठेके के संबंध में कुछ बंगालियों के साथ मिल घोष कंपनी बनवाई थी और उसी नाम से आज भी गोरखपुर में घोष कंपनी चौराहा मशहूर है। परमहंस योगानंद के जीवन के प्रथम आठ वर्ष यहीं पर व्यतीत हुए। इनके पिता रेलवे के प्रथम जनरल मैनेजर होने के साथ ही पीडब्ल्यूडी व कई विभागों के मुखिया भी थे। भूमा शांति मिशन के अध्यक्ष अरुण ब्रह्मचारी ने बताया कि 1914 में आश्रम व्यवस्था के अनुसार संन्यास ग्रहण करने पर इनका नाम मुकुंद लाल घोष से स्वामी योगानंद हो गया और 1935 में इनके गुरु परमहंस युक्तेश्वर गिरी ने इन्हें परमहंस की अग्रेता धार्मिक उपाधि प्रदान की थी।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 21, 2022, 09:40 IST
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