यज्ञ भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपरा : भीष्म रमन स्वामी

संवाद न्यूज एजेंसीहस्तिनापुर। पांडव टीले स्थित प्राचीन राजा रघुनाथ महल में आयोजित 106वें सार्वजनिक विश्व शांति महायज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने आहुति देकर विश्व शांति, सुख-समृद्धि और मानव कल्याण की कामना की।महंत भीष्म रमन स्वामी ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपरा है, जिसका उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वातावरण की शुद्धि और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है। उन्होंने बताया कि यज्ञ से उत्पन्न होने वाली दिव्य ऊर्जा से मानसिक शांति मिलती है और सामूहिक रूप से किए गए अनुष्ठान से समाज में एकता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।उन्होंने कहा कि यह परंपरा आस्था, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। दूर-दराज के जिलों से आए श्रद्धालुओं की भागीदारी इस आयोजन की विशेषता है, जो इसकी लोकप्रियता और महत्व को दर्शाती है।यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण और अन्य व्यवस्थाएं की गईं। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि तीसरे दिन बुधवार को पूर्णाहुति के साथ महायज्ञ का समापन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। राजा रघुनाथ महल पर सार्वजनिक विश्व शांति महायज्ञ में शामिल श्रद्धालु स्रोत संवाद

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 03, 2026, 20:25 IST
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