सोरायसिस बीमारी को लेकर जानकारी देते झांसी मेडिकल काॅलेज त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज श्रीवास्तव

त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि सोरायसिस त्वचा की गंभीर बीमारी है। यह ठीक होने के बाद भी बार-बार होती है। खासतौर से तब जब दर्द निवारक दवाओं का सेवन किया जाए या तनाव अधिक हो। खास बात यह कि जब दर्द निवारक दवा का इस्तेमाल अथवा तनाव कम नहीं होता तो यह सोरियाटिक अर्थराइटिस में बदल जाती है। इससे जोड़ों ही नहीं रीढ़ में भी दिक्कत होने लगती है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में त्वचा पर लाल चकत्ते और पपड़ी होने लगती है, जो कोहनी, घुटनों, सिर पर ज्यादा होती है। जब सोरियाटिक अर्थराइटिस (एक प्रकार का गठिया) होती है, तो जोड़ों का दर्द और सूजन हो जाती है। जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की दिक्कत होती है। डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि एक बार यह बीमारी होने पर बार-बार होती है। खासतौर से यह मर्ज सर्दी में उभरता है। चूंकि इसका स्थायी इलाज नहीं है, इसलिए सावधानी से ही बचाव संभव है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में इन रोगियों की संख्या अब बढ़ने लगी है। ओपीडी में 25-30 रोगी आ रहे हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 28, 2025, 17:13 IST
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