चीनी मिल पीछे... बाराबंकी में कोल्हू पड़े भारी, गुड़ ने बदला गन्ना किसानों का गणित
बाराबंकी में रामनगर क्षेत्र में गांवों में चल रहे कोल्हू इन दिनों किसानों और संचालकों के लिए बेहतर सौदा साबित हो रहे हैं। चीनी मिल जहां घाटे में चल रही है, वहीं कोल्हू पर बनने वाला गुड़ अच्छी आमदनी दे रहा है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में किसान गन्ना मिल की बजाय सीधे कोल्हू पर बेच रहे हैं। रामनगर क्षेत्र में गन्ने की पैदावार अच्छी होती है, लेकिन मिल में सट्टा-पर्ची, लंबा इंतजार और भुगतान में देरी किसानों की पुरानी परेशानी है। इससे बचने के लिए कई किसान कोल्हू का रुख करते हैं। इसके अलावा खेत खाली करने की जल्दी में भी किसान गन्ना कोल्हू पर दे देते हैं। मिल में गन्ने का भाव 400 रुपये प्रति क्विंटल है। इसके बदले एक क्विंटल गन्ने से औसतन साढ़े नौ किलो चीनी बनती है, जिसकी थोक बाजार में कीमत करीब 380 रुपये बैठती है। यही वजह है कि चीनी मिल घाटे में है और बुढ़वल चीनी मिल करीब दो दशक पहले बंद हो चुकी है। वहीं कोल्हू पर किसान 340 से 350 रुपये प्रति क्विंटल में गन्ना बेच रहे हैं। कोल्हू संचालकों के अनुसार एक क्विंटल गन्ने से लगभग 13 किलो गुड़ तैयार होता है। बाजार में गुड़ करीब 45 रुपये किलो बिक रहा है। इस हिसाब से 350 रुपये के गन्ने से करीब 585 रुपये का गुड़ तैयार हो जाता है। कोल्हू संचालकों का कहना है कि एक कोल्हू पर प्रतिदिन 80 से 90 क्विंटल तक गन्ने की पेराई हो जाती है। सभी खर्च निकालने के बाद भी गुड़ का कारोबार मुनाफे में है। रामनगर में तैयार हो रहा गुड़ सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। इसकी मांग सीतापुर, बहराइच, गोंडा और लखनऊ की मंडियों तक बनी हुई है। यही वजह है कि इस सीजन में गांवों के कोल्हू लगातार चलते नजर आ रहे हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 16, 2026, 20:34 IST
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