यूपी: शिक्षामित्रों का खत्म हुआ नौ साल का वनवास, 35-40 हजार से सीधे 10 हजार रुपये मानदेय पर आ गए थे

विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिक्षामित्रों व अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा के साथ ही शिक्षामित्रों का लगभग नौ साल का वनवास खत्म हुआ। पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट से समायोजन निरस्त होने के बाद 2017 में वे अचानक 35-40 हजार से सीधे 10 हजार रुपये मानदेय पर आ गए थे। तबसे वे मानदेय बढ़ाने के लिए आंदोलनरत हैं। प्रदेश में वर्ष 1999 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षामित्रों को रखने की शुरुआत की गई थी। पहले यह सीमित संख्या में थे। बाद में आगे चलकर 2005-06 में इनकी संख्या लगभग दोगुनी की गई थी। यह लगभग 2009 तक बढ़ी संख्या में स्कूलों में पठन-पाठन के लिए तैनात किए गए थे। बाद में इनको आवश्यक ट्रेनिंग दिलाकर दो चरणों में नियमित किया गया। इस तरह प्रदेश में लगभग 1.50 से ज्यादा शिक्षामित्र तैनात हुए थे। इनको 35-40 हजार रुपये वेतन दिया जाने लगा था। सपा सरकार के आखिरी समय में कुछ शिक्षामित्रों का समायोजन रह गया था। वहीं पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट से टीईटी पास न होने के कारण 2017 में उनका समायोजन निरस्त कर दिया गया था। तबसे वे 10 हजार रुपये मानदेय पर काम कर रहे थे। इसके बाद से वे लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग और इसके लिए आंदोलन कर रहे थे। विभिन्न स्तर पर वार्ता होने के बाद अब उनका नौ साल का वनवास प्रदेश सरकार ने खत्म करते हुए मानदेय बढ़ाकर लगभग दोगुना करने की घोषणा की है, जो एक अप्रैल से लागू होगा। वहीं हाल ही में प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के साथ शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को भी पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा में भी शामिल किया गया है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 21, 2026, 08:54 IST
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