रेलवे में निजीकरण : ...तो फिर सस्ती सुविधाओं से वंचित हो जाएंगे यात्री

रेलवे स्टेशनों को जब निजी हाथों में सौंपने की बात आती है तो कई ऐसी सुविधाएं जो यात्रियों को रेलवे की तरफ से दी जाती रही हैं, उनसे वंचित होने की आशंका शुरू हो जाती है। सस्ती दर पर मिलने वाले रिटायरिंग रूम, डोरमेट्री, यात्री निवास, लॉकरूम, विश्रामालय समेत कई ऐसी सुविधा यात्रियों को स्टेशन पर ही मिल जाती हैं, लेकिन जब कोई बिल्डर इन स्टेशनों को लीज पर लेकर विकास करेगा तो इन सुविधाओं से यात्रियों के वंचित रहने का खतरा मंडराने लगता है। स्टेशनों के पुनर्विकास को लेकर रेल यूनियन इस मुद्दे पर भी रेलवे अधिकारियों के साथ बैठक में विरोध दर्ज करा रही हैं। रेलवे तंत्र को कुछ इस तरह विकसित किया गया है कि यात्रियों को स्टेशन पर ही ठहरने और सामान को सुरक्षित रखने की सुविधा मिल सके। हालांकि, निजी हाथों में सौंपने की तैयारी तो कई साल से चल रही है। इसके तहत रेलवे पहले ही रिटायरिंग रूम को विकसित करने का जिम्मा आईआरसीटीसी को दे चुका है। इसी तरह नई दिल्ली समेत कई स्टेशनों के अमानती सामान घर (क्लॉक रूम) का पहले से ही निजी ठेका दे दिया गया है तो स्टेशनों पर विश्रामालय भी आईआरसीटीसी को देने का प्रयोग चल रहा है। सरकारी तंत्र द्वारा यात्रियों को जो सुविधाएं किफायत में दी जा रही थी, अब उनके लिए ज्यादा शुल्क देना पड़ता है। हालांकि, रेलवे द्वारा संचालित विश्रामालय का शुल्क अभी नहीं वसूला जा रहा है, लेकिन जैसे ही स्टेशनों का पुनर्विकास शुरू किया जाएगा तो रेलवे की योजना है कि एयरपोर्ट की तरह यात्रियों से यूजर चार्ज लिया जाए। रिटायरिंग रूम की जगह बन जाएंगे होटल यात्रियों की सुविधा के लिए ज्यादातर स्टेशनों पर ही रिटायरिंग रूम हैं, जहां यात्री कमरा बुक कर सकते हैं। खासकर, पर्यटक इसका इस्तेमाल करते हैं। इसका शुल्क भी शहर के होटलों की अपेक्षा काफी कम होता है, लेकिन जैसे ही प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के तहत स्टेशन का विकास होगा या निजी हाथों में स्टेशन को सौंपा जाएगा, ये रिटायरिंग रूम टूट जाएंगे। इनकी जगह निजी ठेकेदार स्टेशन परिसर में कॉमर्शियल एरिया के तहत होटल का निर्माण करेंगे। इसलिए यात्रियों से सस्ती सुविधा छिन जाएगी। अधर में लटकी बजट होटल की योजना रेल बजट के दौरान कई बार पूर्व रेल मंत्रियों ने स्टेशनों के समीप बजट होटल बनाने की चर्चा की। यात्रियों को उचित मूल्य पर ठहरने की सुविधा को ध्यान में रख बजट होटल का निर्माण होना था, लेकिन यह योजना भी 10 साल से खटाई में है। अब इसकी जगह स्टेशन परिसर में ही बड़े होटल बनाने की तैयारी है। भारतीय रेल गरीब जनता के लिए है : मिश्रा ऑल इंडिया रेलवे मैन फेडरेशन के महासचिव शिवगोपाल मिश्रा का कहना है कि स्टेशन का निजीकरण किया गया तो यात्रियों को मिलने वाली सभी तरह की सुविधा महंगी हो जाएंगी। रेलवे का विकास गरीब जनता को भी ध्यान में रखकर किया गया है। रेलवे के पूरे तंत्र को इस तरह से विकसित किया गया है कि यात्रियों को सभी तरह की सुविधा मिल सकें। सामान चोरी ना हो, इसके लिए अमानती घर की व्यवस्था है। रात में ठहरना हो तो सुरक्षित वातावरण में ही स्टेशन पर बने रिटायरिंग रूम हैं। कम खर्च में डोरमेट्री की व्यवस्था है। निजी हाथों में जाने से इन सभी सुविधाओं से यात्री वंचित हो जाएंगे। गरीब लोगों को अगर इस तरह से सताया जाएगा तो आक्रोश पैदा होगा। सरकार से आग्रह है कि रेलवे बेहतर तरीके से चल रही है। भारत सरकार स्वयं इसका विकास करे। निजी व्यक्ति निजी हित की बात सोचता है। आम जनता के लिए निजी व्यक्ति काम नहीं करेगा। रेलवे एक तरह से सेवा संस्था है। निजी हाथों में सौंपे जाने से उद्योगपति कमाई का स्रोत बना लेंगे। क्लॉक रूम, गेस्ट हाउस, रिटायरिंग रूम सभी महंगे हो जाएंगे। अतिरिक्त सुविधा के नाम पर आम लोगों को ठगा जाएगा। प्राइवेट हाथ में सौंपने के लिए लॉकडाउन में जानबूझकर रेलवे को बंद रखा गया, ताकि घाटा दिखाया जा सके। दिल्ली स्थित जनपथ होटल को भी निजी हाथों में सौंपने के लिए सरकार ने कमरों को बंद करा दिया था। बंद कमरों में सीलन दिखाकर आउटसोर्स कर दिया गया। निजीकरण किया गया तो गरीब लोग कैसे सफर करेंगे बृहस्पतिवार को उत्तरीय मजदूर यूनियन कार्यालय में बैठक हुई, जिसमें निजीकरण का पुरजोर विरोध किया गया। - ऋषि कांत सिंह, दिल्ली स्टेट महामंत्री, राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस, उत्तरीय रेलवे मजदूर यूनियन

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 02, 2021, 06:07 IST
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