भारत-चीन सीमा: एक वर्ष में मिलम से भी चीन सीमा तक पहुंच बना लेगा भारत, जनिए क्या होंगे फायदे

अगले एक वर्ष में मुनस्यारी-मिलम सड़क का निर्माण पूरा होते ही मिलम से भी भारत की चीन सीमा तक पहुंच आसान हो जाएगी। इस सड़क के निर्माण से अग्रिम चौकियों तक पहुंचने के लिए सुरक्षा बलों की आवाजाही सुगम होने के साथ आपात स्थिति में रसद और अन्य सैन्य साजोसामान की आपूर्ति भी आसानी से हो सकेगी। उत्तराखंड की 350 किलोमीटर सीमा चीन से लगी हुई है। चीन सीमा से पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जिले जुड़े हुए हैं। हाल के वर्षों में भारत ने भी चीन सीमा तक पहुंच बनाने के लिए तेजी से सड़कों का निर्माण शुरू किया है। विषम हालातके कारण सड़क का निर्माण कार्य नहीं हो पाया था पूरा पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में स्थित घट्टाबगड़-लिपुलेख सड़क (कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग) की कटिंग का कार्य वर्ष 2020 में पूरा हो चुका है। अभी मुनस्यारी से मिलम के लिए सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। ये भी पढ़ेंउत्तराखंड में जोड़-तोड़ की राजनीति:मुख्यमंत्री धामी और निशंक से दो निर्दलीय प्रत्याशियों के मिलने की चर्चाओं ने पकड़ा जोर लगभग 65 किमी लंबी मुनस्यारी-मिलम सड़क का निर्माण कार्य बीआरओ (बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन) ने 2008 में शुरू किया था। वर्ष 2015 तक सड़क का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। फिर इसे बढ़ाकर वर्ष 2021 किया गया, लेकिन विषम हालातके कारण सड़क का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। अब बीआरओ ने इस सड़क को वर्ष 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। बीआरओ के सूत्रों के अनुसार इस सड़क का निर्माण मुनस्यारी और मिलम दोनों ओर से किया जा रहा है। मिलम से घोड़ालोटन तक 27 किलोमीटर, जबकि मुनस्यारी की ओर से धापा से रेलगाड़ी तक 21 किमी सड़क काटी जा चुकी है। अब 17 किलोमीटर सड़क काटी जानी शेष है। बेहद दुर्गम और कठोर चट्टानों के कारण सड़क काटने में काफी दिक्कतें आ रहीं हैं। मशीनों और मैन पॉवर दोनों से हो रहा सड़क कटिंग का काम सामरिक महत्व की मुनस्यारी-मिलम सड़क कटिंग के लिए जेसीबी सहित तमाम अत्याधुनिक मशीनें पहुंचाईं गई हैं। इन मशीनों को चिनूक हेलिकॉप्टर से मिलम और लास्पा तक पहुंचाया गया है। सड़क निर्माण के लिए बीआरओ ने वहां बड़ी संख्या में मजदूर भी लगाए हैं। सड़क निर्माण में हर साल मौसम बनता है बाधक उच्च हिमालयी क्षेत्र से होकर चीन सीमा के लिए बन रही सड़क का निर्माण आसान नहीं है। यहां का मौसम भी हर साल सड़क कटिंग के कार्य में बाधक बन जाता है। नवंबर से फरवरी तक यहां भारी हिमपात होता है। दो से चार फुट तक हिमपात होने पर मजदूरों को नीचे लौटना पड़ता है। इसके चलते लगभग तीन से चार माह तक सड़क कटिंग का कार्य बंद करना पड़ता है। सड़क बनने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा चीन सीमा के लिए बन रही सड़क के मिलम तक पूरा होते ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। विश्व प्रसिद्ध मिलम ग्लेशियर के लिए हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक मुनस्यारी आते हैं। यहां से ट्रेकिंग करते हुए उन्हें मिलम पहुंचना होता है। सड़क बनने से ट्रेकरों के अलावा अन्य पर्यटक भी मिलम ग्लेशियर तक आसानी से पहुंच सकेंगे।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 09, 2022, 15:47 IST
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