Delhi NCR News: भगवान राम की आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत रहा आईजीएनसीए
--अयोध्या पर्व के दूसरे दिन शबरी के राम और रामराज्य पर हुआ गहन विमर्शसंवाद न्यूज एजेंसीनई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में आयोजित अयोध्या पर्व के दूसरे दिन शनिवार को वैचारिक विमर्श और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सशक्त संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत शबरी के राम विषय पर आयोजित विमर्श से हुई, जिसमें भगवान राम के लोकनायक स्वरूप और समाज के अंतिम व्यक्ति तक उनकी पहुंच पर चर्चा की गई। इस दौरान मुख्य वक्ता के रूप में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा मौजूद रहे। उन्होंने कहा, कि भारत आर्यावर्त भी है और जम्बूद्वीप भी। यह मौका है कि हम खुद को समझें। इस विरासत में हमारी आध्यात्मिक ताकत है, जो आज दिखाई देने लगी है। वहीं, इस सत्र को भाजपा प्रवक्ता डॉ. गुरु प्रकाश पासवान, प्राच्य विद्या के विशेषज्ञ डॉ. विनोद तिवारी, डॉ. कौशल पंवार, डॉ. राजेश पासवान और डॉ. राजीव कुमार वर्मा ने भी संबोधित किया। इसके बाद, पंडित रामकिंकर उपाध्याय की दृष्टि में रामराज्य का भाव विषयक सत्र आयोजित हुआ। इस सत्र में पंडित रामकिंकर उपाध्याय की मानसपुत्री मंदाकिनी रामकिंकर, आचार्य कृष्णकांत, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव, पूर्व आईएएस राजीव गुप्ता और रामकथा मर्मज्ञ देवेंद्र रावत ने अपने विचार रखे। ---विचार-जब भगवान राम की राजधानी और राष्ट्र की राजधानी मिल जाएं, तो परम मंगल का सूचक होता है। - मंदाकिनी, रामायणम ट्रस्ट अयोध्या की अध्यक्ष रामराज्य किसी इंजीनियरिंग से, किसी पंचवर्षीय योजना से नहीं आएगा, यह भाव से आएगा। रामराज्य में राजा सेवा लेने के लिए नहीं, सेवा करने के लिए है।-मनोज श्रीवास्तव, पूर्व मुख्य सचिव, मध्य प्रदेशप्राण प्रतिष्ठा दो तरह की होती है। एक अचल प्रतिष्ठा - जिसमें भगवान को गर्भगृह में स्थापित कर देते हैं और भक्त भगवान के पास दर्शन के लिए आते हैं। दूसरी है- चल प्रतिष्ठा, जिसमें भगवान दर्शन देने भक्तों के पास जाते हैं। अयोध्या पर्व के रूप में दिल्ली में अयोध्या की चल प्रतिष्ठा हुई है। -आचार्य कृष्णकांत
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 04, 2026, 20:39 IST
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