Delhi NCR News: मूक सिनेमा पर आईजीएनसीए में मंथन...विशेषज्ञों ने कहा साइलेंट एरा वास्तव में था सबसे मुखर
संवाद न्यूज एजेंसीनई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में भारतीय सिनेमा के शुरुआती दौर और उसकी मूक परंपरा पर एक विशेष चर्चा का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम धर्मेंद्र ओझा की ओर से लिखित पुस्तक हिंदुस्तानी साइलेंट सिनेमा पर केंद्रित था, जिसमें विशेषज्ञों ने सिनेमा के विकास और उसकी गहरी जड़ों पर विचार साझा किए। मुख्य वक्ता और प्रसिद्ध आलोचक डॉ. ज्योतिष जोशी ने पुस्तक की सराहना करते हुए इसे एक समाजशास्त्रीय हस्तक्षेप करार दिया। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में मूक सिनेमा के स्टूडियो, कलाकारों और वैश्विक विकास पर इतनी विस्तृत जानकारी है कि इसमें चार अलग-अलग किताबों का सार समाहित दिखता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीएनसीए मीडिया सेंटर के प्रमुख अनुराग पुनेठा ने की। नाट्यशास्त्र से जुड़ा है मूक सिनेमावरिष्ठ सिने इतिहासकार डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने एक दिलचस्प पहलू रखते हुए कहा कि मूक सिनेमा वास्तव में मुखर था। उन्होंने इसे भारतीय नाट्यशास्त्र की परंपरा से जोड़ते हुए बताया कि बिना संवाद के भाव-अभिव्यक्ति की गहराई इस दौर में सबसे प्रभावी थी। उन्होंने आधुनिक फिल्म 'ब्लैक' का उदाहरण देते हुए समझाया कि बिना बोले भी सशक्त कहानी कही जा सकती है। लेखक धर्मेंद्र ओझा ने बताया कि यह पुस्तक उनके एक शोध कार्य का परिणाम है, जिसमें भारतीय फिल्मों में गीत-संगीत और नृत्य के प्रारंभिक स्वरूप को भी रेखांकित किया गया है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 31, 2026, 19:25 IST
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