तबाही के 8 महीने बाद संचार बहाल: बादल फटने के जख्म गहरे, नेटवर्क की राहत के बीच दुखों का बड़ा पहाड़ अब भी खड़ा
उपमंडल पाडर का चिशोती गांव आज भी उन जख्मों को भरने की कोशिश कर रहा है जो 14 अगस्त 2025 को बादल फटने की घटना ने दिए थे। उस रात ने न केवल मकानों और मंदिरों को जमींदोज किया बल्कि ग्रामीणों के आजीविका के साधनों को भी मिट्टी में मिला दिया। त्रासदी के आठ महीने बीतने के बाद अब नेटवर्क की राहत मिली है। मगर दुखों का बड़ा पहाड़ अब भी खड़ा है। प्रशासन के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है लेकिन दूरसंचार नेटवर्क की शुरुआत ने ग्रामीणों में नई उम्मीद जगाई है। लंबे समय से बाहरी दुनिया से कटे हुए आपदा प्रभावित क्षेत्र के लिए हाल ही में शुरू हुई दूरसंचार सेवा किसी वरदान से कम नहीं है। हालांकि केवल 2जी नेटवर्क ही उपलब्ध हो पाया है लेकिन लोगों के लिए यह संचार का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। ग्रामीण अब दूरदराज रहने वाले परिजन से बात कर पा रहे हैं और आपातकालीन स्थिति में मदद की गुहार लगा सकते हैं। लंबे समय बाद मिली सुविधा ने लोगों के चेहरों पर थोड़ी मुस्कान जरूर लाई है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 17, 2026, 07:25 IST
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