Chamba News: डाइटीशियन का पद खाली... सर्जरी के बाद भी नहीं बदलती थाली

चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में सर्जरी वाले मरीजों और अन्य बीमारियों वाले मरीजों को एक जैसा ही भोजन दिया जा रहा है। चिकित्सा मानकों के अनुसार सर्जरी के बाद मरीज की डाइट अलग रहती है। वहीं, बुखार पीड़ित, पेट दर्द सहित अन्य बीमारियों के मरीजों की डाइट अलग तय की जाती है, लेकिन मेडिकल कॉलेज में डाइट को निर्धारित करने वाला डाइटिशियन (आहार विशेषज्ञ) ही नहीं है। हालांकि बाल रोग विभाग में एक पोषण के बताने वाली विशेषज्ञ आउटसोर्स आधार पर तैनात की गई हैं, जो कि बीमार बच्चों को उनके खाने को लेकर परामर्श देती हैं। अन्य वार्डों में उपचाराधीन मरीजों का डाइट चार्ट वार्ड नर्स ही तैयार कर रही हैं।मेडिकल कॉलेज में हर समय औसतन 300 से अधिक मरीज उपचाराधीन रहते हैं। इसके अलावा रोजाना यहां ऑपरेशन भी किए जाते हैं। ऐसे में मरीजों को उनकी जरूरत के अनुसार डाइट देने वाला डाइटीशियन का होना भी जरूरी है। वार्ड नर्स रसोई घर में खाने का जो ऑर्डर देती हैं। उसी के अनुसार वार्डों में मरीजों को खाना परोस दिया जाता है। तीमारदार विनोद कुमार, गुरमीत, संजय शर्मा, हंसराज, केवल कुमार, जितेंद्र, मनोज कुमार और तिलक राज ने बताया कि रसोई घर से खाने की जो ट्रॉली पहली मंजिल के वार्ड में जाती है, वही खाना चौथी मंजिल तक विभिन्न वार्डों में उपचाराधीन मरीजों के लिए जा रही है। उनके खाने में किसी प्रकार का कोई बदलाव देखने को नहीं मिलता। पोषण को लेकर विशेषज्ञ से परामर्श लेने की व्यवस्था की जा रही है। डाइटीशियन का पद भरने के लिए प्राचार्य को पत्र भेजा जाएगा। साथ ही संबंधित कर्मचारियों को रोग के अनुसार भोजन देने के निर्देश दिए जाएंगे। -डॉ. प्रदीप सिंह,चिकित्सा अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज चंबागंभीर बीमारी से ग्रसित या लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने वाले मरीजों के लिए डाइटीशियन की जरूरत ज्यादा होती है। सामान्य मरीजों की डाइट के लिए उनकी भूमिका ज्यादा जरूरी नहीं रहती। -डॉ. रोहित ठाकुर, सर्जन, मेडिकल कॉलेज चंबा

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 19, 2026, 22:37 IST
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