Supreme Court: प्रदूषित नदियों से जुड़े मामले को सुप्रीम कोर्ट ने किया बंद, एनजीटी को दिए निगरानी के निर्देश

प्रदूषण मुक्त जल के अधिकार को मौलिक अधिकार मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रदूषित नदियों से जुड़ी 2021 की अपनी स्वतः संज्ञान कार्यवाही को समाप्त कर दिया। अदालत ने राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ को मामले को फिर से खोलने और निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने शुरुआत में 13 जनवरी, 2021 के उस आदेश पर सवाल उठाया, जिसमें नदियों में दूषित जल के प्रदूषण का स्वतः संज्ञान लेते हुए समानांतर कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया गया था। जबकि नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) पहले से ही इसी तरह के मामले पर विचार कर रहा था। ये भी पढ़ें:हल्द्वानी अतिक्रमण विवाद:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जमीन रेलवे की है, अतिक्रमणकारी शर्तें तय नहीं कर सकते क्या अदालत के लिए सभी प्रदूषित नदियों का जायजा लेना संभव :सुप्रीम कोर्ट मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, 'क्या इस अदालत के लिए सभी प्रदूषित नदियों का जायजा लेना संभव है हम एक-एक करके देख सकते हैं। हम इतने सारे मामलों पर सुनवाई करते हैं और निर्देश जारी करते हैं। हमें यह भी देखना होगा कि हम मामलों पर एक साथ सुनवाई करें। इस तरह के अनेक मामलों की क्या आवश्यकता है' यह टिप्पणी तब की गई जब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने एनजीटी के समक्ष इसी तरह के एक लंबित मामले का जिक्र किया। विधि अधिकारी ने पीठ से विचार करने का आग्रह किया कि क्या वह सुनवाई जारी रखना चाहती है या क्या एनजीटी से सुनवाई को फिर से शुरू करने के लिए कहा जा सकता है। एनजीटी के दिए मामले की निगरानी के निर्देश दोनों पक्षों की बात कुछ समय तक सुनने के बाद पीठ ने एनजीटी को मामले को फिर से खोलने का निर्देश दिया। इस बात पर जोर देते हुए कि नदियों को बचाने के लिए आवश्यक निरंतर निगरानी के लिए एक विशेष निकाय बेहतर रूप से सुसज्जित है। ये भी पढ़ें:Supreme Court Updates:फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर पीठ ने निर्देश में यह भी कहा किइसमें कोई संदेह नहीं है कि स्वच्छ वातावरण और स्वच्छ जल के साथ मानवीय गरिमापूर्ण स्वच्छ परिस्थितियों में रहने का अधिकार अनुच्छेद 21 में निहित है। जल प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रभाव इस न्यायालय का ध्यान आकर्षित करता है। अन्य वीडियो

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 24, 2026, 17:32 IST
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