Bilaspur News: परिवार, सामज, भविष्य को भी प्रभावित करता है नशा
एम्स का नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान तेजरौड़ा और मार्कंडेय स्वास्थ्य केंद्रों में चलाया अभियानयुवाओं को नशे के दुष्परिणाम और बचाव के बताए उपायसंवाद न्यूज एजेंसीबिलासपुर। एम्स बिलासपुर में नशे की लत से जूझ रहे मरीजों का ओपीडी और आईपीडी में उपचार लगातार किया जा रहा है। अब संस्थान ने लोगों को नशे का आदी बनने से पहले ही जागरूक करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। इसी उद्देश्य से नशा मुक्त भारत सप्ताह के दौरान एम्स ने अस्पताल से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक विशेष जनजागरूकता अभियान शुरू किया है।अभियान का उद्देश्य लोगों, खासकर युवाओं को नशे के दुष्परिणामों से अवगत करवाना और उन्हें इसकी गिरफ्त में आने से पहले ही सचेत करना है। कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह, एवीएसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) के मार्गदर्शन में सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग ने ओपीडी ब्लॉक स्थित स्टाफ वेलनेस क्लिनिक के वेटिंग एरिया, शहरी स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र रौड़ा और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र मार्कंडेय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए।अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचे मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्य कर्मियों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी अभियान से जोड़ा गया। कार्यक्रमों में चिकित्सकों ने बताया कि नशीले पदार्थों का सेवन केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, सामाजिक जीवन और भविष्य को भी प्रभावित करता है। विशेषज्ञों ने युवाओं में बढ़ते नशे के चलन को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि यदि शुरुआत में ही लोगों को इसके खतरों के प्रति जागरूक कर दिया जाए तो कई लोगों को नशे की लत से बचाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से उपचार के साथ-साथ रोकथाम पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।जागरूकता सत्रों में प्रतिभागियों को नशे की शुरुआती पहचान, इसके शारीरिक और व्यवहार संबंधी संकेत, उपलब्ध उपचार सुविधाओं तथा नशा मुक्ति सेवाओं की जानकारी दी गई। चिकित्सकों ने बताया कि किसी व्यक्ति को नशे की लत से बाहर निकालने में दवाइयों के साथ-साथ परिवार और समाज का सहयोग भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। लोगों से अपील की गई कि नशे की समस्या को छिपाने के बजाय समय रहते विशेषज्ञों से संपर्क करें।अभियान के दौरान नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े लक्षणों की जानकारी वाले पंपलेट मरीजों और उनके परिजनों में वितरित किए गए। ओपीडी में उपचार के लिए आए लोगों को भी नशे से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई, ताकि वे स्वयं जागरूक हों और अपने परिवार व समाज तक यह संदेश पहुंचा सकें। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने नशीले पदार्थों से दूर रहने और समाज को नशा मुक्त बनाने की सामूहिक शपथ ली। इन गतिविधियों में सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग के संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर और प्रशिक्षु इंटर्न्स शामिल रहे।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 01, 2026, 17:59 IST
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