स्टार्टअप्स: बच्चों के दूर जाने पर बुजुर्गों का नया सहारा, लेकिन महंगी सेवाएं-ट्रेंड स्टाफ की कमी बनी चुनौती

रोजगार और बेहतर अवसरों के लिए युवाओं के दूसरे शहरों और विदेशों में बसने से भारत में बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल बड़ी चुनौती बनती जा रही है। संयुक्त परिवारों की परंपरागत व्यवस्था कमजोर होने के बीच अब स्टार्टअप घर पर चिकित्सा सहायता, स्वास्थ्य निगरानी, सुरक्षित आवास और अकेलेपन से निपटने के लिए नई सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि, इन सेवाओं की बढ़ती मांग के बावजूद उनकी ऊंची लागत और प्रशिक्षित देखभालकर्मियों की कमी बड़ी बाधाएं हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के अनुमान के अनुसार वर्ष 2050 तक भारत की आबादी में 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी करीब 21 प्रतिशत हो सकती है। यानी देश में लगभग हर पांचवां व्यक्ति बुजुर्ग होगा। वैश्विक स्तर पर भी इस आयु वर्ग की आबादी 2020 से 2050 के बीच दोगुनी होकर 2.1 अरब पहुंचने का अनुमान है। जकार्ता में रहने वाले विज्ञापन क्षेत्र के अधिकारी अरिंदम भट्टाचार्य को वर्ष 2024 में अपने माता-पिता की देखभाल के लिए नई व्यवस्था की जरूरत महसूस हुई। उनके पिता को अचानक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हुई। अब वह दो स्टार्टअप की मदद से उनके स्वास्थ्य की निगरानी और चिकित्सा सहायता का प्रबंध करते हैं। घर पर देखभाल देने वाली कंपनियां नर्सिंग, दवा, स्वास्थ्य जांच और आपातकालीन चिकित्सा सहायता जैसी सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इस तरह कई परिवारों में देखभाल की जिम्मेदारी अब पेशेवर कर्मियों पर भी आ रही है। तकनीक से होगी निगरानी अकेलेपन से लड़ने की पहल बंगलूरू की कुबो केयर और नोब्लिंक डॉट एआई जैसी कंपनियां सेंसर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से बुजुर्गों की गतिविधियों पर नजर रखने वाली प्रणालियां उपलब्ध करा रही हैं। इनके जरिए किसी व्यक्ति के गिरने या अचानक अस्वस्थ होने का संकेत मिलने पर मदद पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकती है। वहीं गुडफेलोज जैसी कंपनियां बुजुर्गों को समय देने, बातचीत करने और तकनीक के इस्तेमाल में मदद के लिए युवा सहयोगी उपलब्ध कराती हैं। इसका उद्देश्य बुजुर्गों का अकेलापन कम करना है। किफायती देखभाल सबसे बड़ी चुनौती नीति आयोग के अनुसार भारत के 78 प्रतिशत बुजुर्गों को पेंशन नहीं मिलती। ऐसे में निजी देखभाल सेवाओं और वरिष्ठ आवास का खर्च उठाना बड़ी आबादी के लिए मुश्किल है। इसके अलावा, देखभालकर्मियों को प्रशिक्षित करना भी बेहद जरूरी है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 02, 2026, 05:16 IST
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