Kangra News: राजस्व प्रविष्टियां भूमि पर मालिकाना हक का आधार नहीं, व्यक्ति का दावा खारिज
धर्मशाला। सिविल अदालत कांगड़ा ने ग्राम पंचायत से पांच साल के लिए पट्टे पर मिली शामलात भूमि पर स्थायी कब्जे और मालिकाना हक का दावा करने वाले व्यक्ति का 11 वर्ष पुराना सिविल वाद खारिज कर दिया है। वरिष्ठ सिविल जज कांगड़ा अनीता शर्मा की अदालत ने स्पष्ट किया कि पांच साल की लीज वर्ष 1975 में ही समाप्त हो गई थी और उसका कभी नवीनीकरण नहीं कराया गया। कोर्ट ने कहा कि केवल राजस्व रिकॉर्ड की प्रविष्टियों के आधार पर किसी को भूमि पर मालिकाना अधिकार नहीं मिल सकता। अदालत ने दौलतपुर क्षेत्र के एक व्यक्ति की ओर से दायर घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा की मांग वाली याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। वादी का दावा था कि उनके पिता को वर्ष 1970 में ग्राम पंचायत ने पांच साल के लिए जमीन पट्टे पर दी थी, जिस पर बाद में मकान बनाया गया। उन्होंने वर्ष 2006 में भूमि को राज्य सरकार के नाम दर्ज करने वाली म्यूटेशन को अवैध बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की थी। दूसरी ओर राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पट्टे की अवधि समाप्त होने के बाद हिमाचल प्रदेश ग्राम कॉमन लैंड वेस्टिंग एंड यूटिलाइजेशन अधिनियम, 1974 के तहत यह भूमि स्वतः सरकार में निहित हो गई थी। सुनवाई के दौरान वादी न तो पट्टा नवीनीकरण का कोई आवेदन दिखा सका और न ही किराया जमा करने का रिकॉर्ड दे पाया। अदालत ने यह भी पाया कि वादी ने संबंधित ग्राम पंचायत को मामले में पक्षकार ही नहीं बनाया था। अदालत ने माना कि निश्चित अवधि का पट्टा समय पूरा होने पर खत्म हो जाता है, इसलिए याचिका को पूरी तरह निरस्त किया जाता है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 01, 2026, 18:11 IST
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