अयोध्या: एक मैदान, दो दरबार व साझा रामलीला; हिंदू-मुस्लिम कलाकार मिलकर करते हैं मंचन, छह दशक से निभ रही परंपरा

मैदान के एक छोर पर राम का दरबार, दूसरे पर रावण का। बीच में खुले मैदान में रामकथा के प्रसंगों का मंचन और दर्शकों के बैठने की परंपरागत व्यवस्था। अयोध्या के मुमताज नगर की यह रामलीला छह दशक से अधिक समय से सांप्रदायिक सौहार्द और साझा सांस्कृतिक विरासत की मिसाल बनी हुई है। वर्ष 1963 में शुरू हुई इस रामलीला में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर आयोजन करते हैं और मंच पर विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाते हैं। श्री रामलीला रामायण समिति ट्रस्ट, मुमताज नगर की इस रामलीला में हर साल स्थानीय लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इस बार शाहीन अली, मोहम्मद इकलाख, जाबीर अली और मोहम्मद रईस समेत पांच-छह मुस्लिम कलाकार अलग-अलग पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। आयोजन की व्यवस्थाओं से लेकर मंचन तक में मुस्लिम समुदाय की सक्रिय भागीदारी रहती है। समिति के कोषाध्यक्ष राजेश कुमार तिवारी के मुताबिक, यह रामलीला सामाजिक सौहार्द की अनूठी मिसाल है। मुस्लिम समाज के लोग गर्व से रावण के सेनापति और सेना के सदस्यों सहित अन्य पात्रों की भूमिकाएं निभाते हैं। आयोजन में दोनों समुदायों का सहयोग इसकी परंपरा को मजबूत बनाता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 28, 2026, 08:31 IST
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