Bangladesh Referendum: जनमत संग्रह से पहले मोहम्मद यूनुस की खुली अपील, कहा- 'हां' बोलेगा तो बदलेगा बांग्लादेश

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने 12 फरवरी को होने वाले जनमत संग्रह (रेफरेंडम) में लोगों से खुलकर 'हां' वोट देने की अपील की है। यह जनमत संग्रह आम चुनावों के साथ ही कराया जा रहा है। यह भी पढ़ें - Bangladesh Polls: बांग्लादेश में आज थमेगा चुनावी शोर; BNP ने लगाई वादों की झड़ी, कहा- बनाएंगें आत्मनिर्भर देश क्या है जनमत संग्रह का मुद्दा यह जनमत संग्रह यूनुस सरकार द्वारा पेश किए गए 84 बिंदुओं वाले सुधार पैकेज पर जनता की सहमति जानने के लिए कराया जा रहा है। इस सुधार प्रस्ताव को 'जुलाई नेशनल चार्टर-2025' नाम दिया गया है। यूनुस का कहना है कि इस चार्टर के लागू होने से देश में 'कुशासन' को रोका जा सकेगा। सरकारी मशीनरी पर पक्षपात के आरोप बांग्लादेश बैंक के आदेश पर सरकारी दफ्तरों में 'हां' वोट के बैनर लगाए गए। बैंकों से कहा गया कि वे सीएसआर फंड का इस्तेमाल जनमत संग्रह के समर्थन में एनजीओ अभियानों के लिए करें। चुनाव आयोग ने 29 जनवरी के बाद सरकारी अधिकारियों को प्रचार से रोका और इसे दंडनीय अपराध बताया। संविधान को लेकर गंभीर सवाल कई कानूनी विशेषज्ञों ने इस जनमत संग्रह की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बांग्लादेश के संविधान में जनमत संग्रह का कोई प्रावधान नहीं है। अंतरिम सरकार को निष्पक्ष रहना चाहिए था, लेकिन वह खुलकर 'हां' के पक्ष में प्रचार कर रही है। प्रसिद्ध विधिवेत्ता स्वाधीन मलिक ने कहा कि जुलाई चार्टर और उस पर जारी राजपत्र (गजट) मौजूदा संविधान के खिलाफ हैं। राष्ट्रपति की भूमिका पर भी विवाद इस प्रस्ताव पर राष्ट्रपति मोहम्मद शाबुद्दीन के हस्ताक्षर के बाद आधिकारिक गजट जारी किया गया। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब संविधान न तो रद्द हुआ है और न ही निलंबित, तो राष्ट्रपति ऐसा गजट कानूनी रूप से मंजूर नहीं कर सकते। यह भी पढ़ें - US-Bangladesh Trade Pact: अमेरिका ने बांग्लादेश को दी बड़ी राहत, टैरिफ घटाकर 19% किया; RMG सेक्टर को फायदा क्या हैविपक्ष की आपत्ति आलोचकों का कहना है कि चार्टर में कई जटिल सुधार शामिल हैं। एक ही सवाल में हां या ना का विकल्प देना मतदाताओं के लिए भ्रमित करने वाला है। यह जनमत संग्रह अगली सरकार पर चार्टर लागू करने का दबाव बनाने और यूनुस सरकार को वैध ठहराने की कोशिश है। यह अंतरिम सरकार उस जनआंदोलन के बाद बनी थी, जिसे 'जुलाई विद्रोह' कहा गया और जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। अन्य वीडियो

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 10, 2026, 04:39 IST
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