जेएनयू : आईसीसी यौन उत्पीड़न काउंसलिंग सत्र पर विवाद, राष्ट्रीय महिला आयोग ने जताई आपत्ति

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस एक बार फिर विवादों में है। इस बार विवाद जेएनयू प्रशासन की ओर से गठित आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का यौन उत्पीड़न पर काउंसिलिंग सत्र के आयोजन पर जारी सर्कुलर है। इसमें कहा गया कि यौन उत्पीड़न से बचने के लिए महिलाओं को जानना चाहिए कि पुरुष दोस्तों के साथ कैसे दायरा बनाना है। हालांकि छात्राओं के विरोध के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इसे महिला विरोधी बताते हुए वापस लेने की मांग की है। दरअसल, इसमें लिखा है कि लड़कियों को यौन उत्पीड़न से बचने के लिए खुद रेखा खींचनी चाहिए। वहीं, आईसीसी अधिकारी का कहना है कि उन्होंने सर्कुलर के एक प्वाइंट की भाषा में बदलाव कर दिया है, जिसके चलते छात्राओं को समझने में दिक्कत हुई। हालांकि, सर्कुलर वापस लेने की बात उन्होंने सिरे से नकार दी है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एक बार फिर से चर्चा में है। इस बार चर्चा का कारण है सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के तहत यौन उत्पीड़न मामलों के निपटारे के लिए गठित कमेटी द्वारा जारी एक नोटिस है। इसमें लड़कियों को इससे बचने के लिए अपने पुरुष मित्रों के साथ दोस्ती को सीमा में बांधने की सलाह दी गई है। जेएनयू छात्रसंघ और आइसा समेत कई छात्राओं ने इसका विरोध जताया है। छात्राओं का कहना है कि यहां जिन पर अत्याचार होता है उनसे ही अत्याचार से बचने के लिए कहा जा रहा है, यूनिवर्सिटी की यह अजीब सलाह है। नोटिस के अन्य बिंदु मुख्य तौर पर महिला छात्रों से अपने पुरुष मित्रों से उचित दूरी बनाने और एक रेखा खींचने के लिए कहा गया है ताकि उनके साथ होने वाले उत्पीड़न को टाला जा सके। परिपत्र में यह भी कहा गया कि इस प्रकार के सत्र मासिक तौर पर आयोजित किए जाएंगे। इसमें लिखा है , आईसीसी के सामने ऐसे कई मामले आए, जहां यौन उत्पीड़न नजदीकी दोस्तों के बीच हुआ था। लड़के आमतौर पर (कभी जानबूझकर कभी अनजाने में) दोस्ती और यौन उत्पीड़न के बीच की रेखा को लांघ जाते हैं। लड़कियों को यह जानना चाहिए कि वह ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए (खुद और अपने पुरुष दोस्तों के बीच) एक वास्तविक रेखा कैसे खींचें। हम न्याय की उम्मीद कहां से करेंगे जेएनयू आंतरिक शिकायत समिति 17 जनवरी को आयोजित होने वाले कांउसलिंग सेशन के लिए नोटिस जारी किया है, उसका विषय है यौन उत्पीड़न के मामलों को कम करना। जेएनयू प्रशासन मान रहा है कि महिला ही यौन उत्पीड़न के लिए दोषी होती है। नोटिस में लिखा है कि इस कांउसंलिंग सेशन के बाद जेएनयू इंटरनल कंप्लेंट कमेटी में शिकायतों की संख्या कम हो जाएगी। यह सही है, क्योंकि इस नोटिस और काउंसलिंग सेशन के बाद कोई भी पीड़ित महिला छात्र या प्रोफेसर शिकायत के लिए आईसीसी के पास नहीं जाएगी। -मधुरिमा छात्रा और आइसा सचिव, जेएनयू सेशन छात्र और छात्राओं दोनों के लिए ऐच्छिक है: राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से कोई नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने ट्विटर पर अपनी बात रखी है तो हम भी उसका जवाब वही देंगे। जिस प्वाइंट की भाषा से छात्राएं गलत मतलब समझ रही है, उसमें बदलाव कर दिया गया है। हालांकि सेशन नोटिस वापस नहीं लेंगे। नोटिस को गलत ढंग से पेश किया गया है। यह लड़कियों के अलावा लड़कों के लिए भी है। इसमें सभी को आना जरूरी नही है। -पूनम कुमारी, प्रोसीडिंग आफिसर, आईसीसी, जेएनयू ट्विटर पर परिपत्र को साझा करते हुए उसे वापस लेने का आग्रह: रेखा शर्मा राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने ट्विटर जेएनयू द्वारा जारी उस परिपत्र को वापस लेने का आग्रह किया है। साथ ही लिखा है कि सारा उपदेश लड़कियों के लिए ही क्यों होता है अब पीड़ितों के बजाय उत्पीड़न करने वालों को पाठ पढ़ाने का समय आ गया है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 29, 2021, 02:57 IST
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