झांसीः छुट्टी न मिलने पर व्हाट्सएप पर इस्तीफा देने वाले सीओ मनीष सोनकर का पत्र वायरल, पढ़ें क्या लिखा

कोरोना से पत्नी के संक्रमित होने के बाद अवकाश स्वीकृत न होने से नाराज सीओ सदर मनीष चंद्र सोनकर ड्यूटी पर न लौटकर एसएसपी रोहन पी कनय को इस्तीफा भेज दिया। पत्नी के संक्रमित होने के बाद सीओ मनीष बिना अवकाश स्वीकृत कराए घर चले गए थे।चुनाव ड्यूटी करने भी वह नहीं पहुंचे। एसएसपी के तलब करने पर सीओ ने उनको व्हाट्सएप पर अपना इस्तीफा लिखकर भेज दिया। एसएसपी ने इसे अनुशासनहीनता बताते हुए उनके लिए डीओ लेटर जारी कर दिया है। इस घटना के बाद से सीओ मनीष का व्हाट्सएप पर लिखा इस्तीफा वायरल हो रहा है। जानिए उन्होंने क्या लिखा था सीओ मनीष सोनकर का वायरल पत्र जय हिंद दोस्तों । मेरा नाम मनीष चंद्र सोनकर है मैं 2005 बैच का यूपी पीपीएस ऑफिसर हूं । वर्तमान में मैं जनपद झांसी में क्षेत्राधिकारी सदर के पद पर नियुक्त हूं । मेरे साथ मेरी पत्नी और 4 साल की बेटी रह रही है । मैं विगत 12 सालों से पूर्ण निष्ठा और मनोयोग से अपने पद के कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सेवा दे रहा हूं। चाहे जैसी भी परिस्थितियां आई हों चाहे परिवार में कोई भी परेशानी आई हो, मेरे परिवार में चाहे कोई कितना भी बीमार रहा हो चाहे कोई मर भी गया हो, कोई न कोई ऑल्टरनेट व्यवस्था का प्रयास कर हमेशा स्वयं से आगे पुलिस सेवा( thank less) को रखा है और यह मैं सिर्फ इसलिए कर पाया क्योंकि परिजन विशेषकर मेरी पत्नी द्वारा हमेशा बिना किसी शर्त के समर्थन दिया गया। इसके बावजूद इस महामारी के काल में जब एक बार मेरे परिवार को मेरी जरूरत पड़ी सिर्फ एक बार, जब मैं मेरे किसी परिवारिजन या इष्टजन को नहीं बुला सकता अपनी जगह काम करने के लिए ( बिना उनके जीवन को भय में डाले) तो भी ये विभाग और इसके कर्णधार को ये गंवारा नहीं हुआ कि मुझे मेरे परिवार के साथ इस विपत्ति काल में अकेले छोड़ दें मदद करने के बजाए प्रताड़ना करना शुरू कर दिया। जैसा कि मैं पहले बता चुका हूं कि मैं अपनी पत्नी और चार साल की बच्ची झांसी में नियुक्ति के दौरान रह रहे हैं और सुरक्षा कारणों से कोरोना काल की शुरुआत से ही घर के अलग अलग हिस्से में रह रहे हैं। मेरी पत्नी को पिछले कई दिनों से हाई डिग्री का बुखार आ रहा था। उससे पहले 20 अप्रैल 2021 से मैं हाई डिग्री के बुखार से पीड़ित रहा 5 बार टेस्ट कराया पर निगेटिव कोरोना रिपोर्ट आई, इसलिए मैं दवाइयां लेकर कार्य करता रहा। इस दौरान मेरी पत्नी पूरी सावधानियां रखते हुए मेरा पूरा खयाल रखती रहीं, मेरी दवाइयां(पत्नी स्वयं होमियोपैथिक डॉक्टर हैं), खाना पीना और उसके ऊपर प्रेमवत व्यवहार रखते हुए मुझे जल्दी ठीक कर दिया और इस दौरान जब-जब अपराध से लेकर लॉकडाउन का पालन कराने की बात हो हर काम दवाइयां लेते हुए करता रहा। 30 अप्रैल 2021 को मेरी पत्नी मेरा और मेरी बेटी का कोविड टेस्ट कराया जिसमें मेरी पत्नी का रैंडम टेस्ट पॉजिटिव आया। मेरी पत्नी को तुरंत आइसोलेट करना पड़ा और मेरी 4 वर्ष की बेटी जो जन्म के बाद से ही सिर्फ अपनी मां के साथ ही रही है, को मेरे पास आना पड़ा। साथ ही मैं घर में अकेला एडल्ट मेंबर बचा मेरी पत्नी की सेवा करने की जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई। जान-पहचान के लोगों से मदद इसलिए नहीं ले सकते थे क्योंकि मेरी पत्नी के कोरोना पॉजिटिवहोने से पहले बेटी लगातार उसके साथ रह रही थी। मेरी पत्नी जो स्वयं डॉक्टर हैं, अपने सभी vitals को मेरी मदद से लगातार मॉनिटर करते हुए सही खानपान और कोरोना किट की दवाइयों और होम्योपैथिक दवाइयों को सही तरह से प्रयोग कर अपना इलाज कर सकती है, पर एक मां के रूप में उसकी सबसे बड़ी चिंता उसकी बेटी है, जिसको वो किसी भी अनजान आदमी को देकर सुकून से नहीं रह सकती है। जिस वजह से वह बहुत घबरा रही थी, जो किसी भी फेफड़े के संभावित रोगी के लिए बहुत ही ज्यादा हानिकारक है। हमारी स्वास्थ सेवाएं पहले ही बहुत ज्यादा स्ट्रेच हो चुकी हैं और पेशेंट को वो कितना केटर करेंगी हम सब जानते हैं। अतः मेरी पत्नी की तबीयत जल्दी ठीक हो जाए और मेरी पुत्री का स्वास्थ बना रहे। इसलिए मैंने फोन के जरिए एसएसपी झांसी महोदय को अवगत कराते हुए एक मई 2021 से 6 दिवस के आकस्मिक अवकाश प्रदान करने हेतु आवेदन किया। परंतु इस कठिन समय में साथी अधिकारी के रूप में मेरे साथ संवेदनापूर्वक व्यवहार करने के बजाय एसएसपी झांसी द्वारा मेरी ड्यूटी 2 मई से 3 मई तक बड़ागांव ब्लॉक के पंचायत चुनाव की मतगणना में लगा दी। साथी अधिकारी व कर्मचारीगणों के साथ पूर्ण समन्वय करते हुए मैंने ये सुनिश्चित किया कि समस्त पुलिस बल ड्यूटी पर पहुंच जाएं और साथी अधिकारी व कर्मचारीगणों के साथ दूरभाष पर लगातार संपर्क पर रहा। दो मई को मेरे द्वारा अवकाश हेतु एसएसपी झांसी से फोन पर दोबारा निवेदन किया। परंतु उनके द्वारा बोला गया कि फॉलोवर के भरोसे अकेले को 4 साल की बेटी को छोड़ कर ड्यूटी पर चले आओ। (जो एक दिन पहले आया था। चाहे वो बेटी के साथ कैसा भी व्यहवार करे उसको देखने के लिए कोई घर पर नहीं होगा , पत्नी की प्रयोग की गई चीजों को सुरक्षित ढंग से रखे या ना रखे , बेटी जो बार बार पत्नी के पास जाने के लिए मचल रही हो उसको मार पीट कर दुर्व्यवार कर उसको चुप कराए।) मैंने आने में असमर्थता जतायी और उनसे पुनः अवकाश स्वीकृत करने हेतु निवेदन किया जिसे उन्होंने मना कर दिया। तो मैंने उनसे बोला कि आप अवकाश स्वीकृत नहीं कर सकते तो मैं इस स्थिति में कार्य करने को तैयार नहीं हूं और मैं अपना त्यागपत्र दे रहा हूं। जिसपर उन्होंने कहा ठीक है और फोन काट दिया। जिसपर मैंने माननीय राज्यपाल को संबोधित त्यागपत्र को उचित माध्यम से भेज दिया। मेरे त्यागपत्र हेतु आवेदन प्राप्त करते ही दिनांक दो मई को ही माननीय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा संज्ञान लेते हुए अग्रिम कार्यवाही हेतु संबंधित अधिकारी और पुलिस मुख्यालय को आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजा। साथ ही insult over injury करते हुए मेरे एक मई के आवेदन के क्रम में दिनांक 3 मई से 6 मई तक अवकाश प्रदान कर दिया जबकि बड़ागांव मतगणना लगातार जारी ही थी। अब झांसी के बड़ागांव ब्लॉक में मतगणना सकुशल समाप्त हो चुकी है और अगर मुझे त्यागपत्र के आवेदन के बाद छुट्टी मिल सकती थी तो पहले भी मिल सकती थी। ऐसीअप्रत्याशित विपत्तिकाल में भी छुट्टी न देना मतलब साफ है कि इस प्रकार के आईपीएस (जो स्वयं कितना पुलिस ऑफिस आते हैं और क्षेत्र में निकलते हैं ये जगजाहिर है) हमें अपने से कमतर मनुष्य समझते हैं और अभी भी कोलोनियल और सामंती विचारों से ही पीड़ित हैं, जिसने हमको इस कोरोनो काल में दुनिया में सबसे भयावह स्थिति पर ला दिया है। एक समाज के रूप में हम और कितना गिरेंगे जब हम एक परिवार ( जो कि समाज की इकाई है ) को जीवन रक्षक सुविधा देने की बजाय उनको स्वयं को बचाने के प्रयासों को भी करने में आड़े आएंगे। मेरे त्यागपत्र स्वीकार होने के बाद भी मेरा परिवार दुखी नहीं होगा क्योंकि हम सब साथ में होंगे और जीवन यापन के लिए कुछ न कुछ तो कर ही सकता हूं। ये भी तय है कि ये काल भी बीत जाएगा पर मानव वेदनाएं और चित्कार सुन-सुन कर भी यह व्यवस्था और नीति निर्धारक colonial bosses और काले अंग्रेजों की तरह अमानवीय होकर बहरे होते जा रहे हैं। क्योंकि वो व्यक्ति या उनके बीच का नहीं या फिर बड़ा नाम नहीं है। जिस वजह से यह भी तय है कि आने वाली पीढ़ियां हमारी व्यवस्था को कोसेंगी जैसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नाजी जर्मनी की व्यवस्था के साथ किया था।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 04, 2021, 17:33 IST
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