Yamuna Nagar News: पूर्व सरपंच पर महिला से 15 लाख हड़पने का आरोप, प्राथमिकी दर्ज
रादौर। ठगी के आरोपों में भागे भूरे का माजरा के पूर्व सरपंच ऋषिपाल उर्फ काला के खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस बार पंजाब के जीरकपुर निवासी महिला ने आरोप लगाया है कि उसे रुपये दोगुने करने का झांसा देकर 15 लाख रुपये की ठगी की गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर रादौर थाना में पूर्व सरपंच के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पुलिस को दी शिकायत में जीरकपुर स्थित हर्मिटेज पार्क ढकौली निवासी निशा चौहान ने बताया कि उसकी मुलाकात पिंजौर निवासी टिंकू ठाकुर के माध्यम से ऋषिपाल से कराई गई थी। टिंकू ने उसे यह भरोसा दिलाया था कि ऋषिपाल ऐसा व्यक्ति है जो लोगों के पैसे दोगुने कर देता है। इसके बाद वह टिंकू के साथ ऋषिपाल के घर पहुंची, जहां उसकी पत्नी और कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे। महिला के अनुसार, उसने विश्वास में आकर 15 लाख रुपये की नकदी ऋषिपाल को सौंप दी। कुछ समय बाद जब आरोपी के घर जाकर उसने रकम दोगुनी कर वापस मांगी तो ऋषिपाल ने उसे पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाया। इसके बाद उसे घर के पिछले गेट से बाहर भेज दिया गया और आश्वासन दिया गया कि उसकी रकम बाद में घर पहुंचा दी जाएगी, लेकिन आज तक पैसे वापस नहीं मिले। पीड़िता का कहना है कि यह राशि उसने अपने सेब के बाग की आय से एकत्र की थी, जिससे वह अपने परिवार का भरण-पोषण करती है। कई बार संपर्क करने के बावजूद आरोपी ने पैसे लौटाने से इंकार कर दिया। पुलिस प्रवक्ता का कहना है कि पुलिस ने नई प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी ऋषिपाल की तलाश तेज कर दी गई है। सभी शिकायतों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है।-----पुलिस का डर दिखाकर ठगी का नेटवर्कगौरतलब है कि ऋषिपाल पर पहले भी ठगी की कई प्राथमिकी दर्ज हैं और वह लंबे समय से फरार चल रहा है। 25 अप्रैल की रात उसके घर पर फायरिंग की घटना भी हुई थी, जिसके बाद से वह लगातार चर्चा में है। हालांकि फायरिंग से पहले ही उसका मकान खाली पड़ा था और वह मौके से फरार बताया जा रहा था। तब उसके परिजनों ने गैंगस्टरों पर उसके घर पर फायरिंग करने का आरोप लगाया था। जांच में सामने आया है कि पूर्व सरपंच ऋषिपाल और उसके साथी कथित रूप से संगठित तरीके से ठगी करते थे। योजना के तहत लोगों को पैसे दोगुने करने का लालच देकर घर बुलाया जाता था। वहां पहले से मौजूद लोग और माहौल बनाकर उन्हें भरोसा दिलाया जाता था। इसके बाद अचानक पुलिस छापे की कहानी रची जाती थी और पीड़ितों को डराया जाता था कि वे पकड़े जा सकते हैं। इसी डर का फायदा उठाकर उनसे नकदी ले ली जाती थी। कई मामलों में लोग डरकर मौके पर ही पैसे छोड़कर चले जाते थे और बाद में उन्हें वापस नहीं मिलते थे। आरोपी नकली नोटों को असली बताकर भी लोगों को भ्रमित करता था और अलग-अलग तरीकों से ठगी को अंजाम देता था। संवाद
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 02, 2026, 03:53 IST
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