मुआवजे के लिए आश्रित होना अनिवार्य नहीं: हाईकोर्ट ने पलटा मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल जींद का फैसला
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सड़क दुर्घटना में माता-पिता की मौत होने पर शादीशुदा और कमाने वाले बेटा-बेटी भी मुआवजे के हकदार हैं। मुआवजे के लिए आश्रित होना अनिवार्य नहीं है। जस्टिस विकास बहल ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) जींद के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें आश्रित न होने के आधार पर मुआवजा देने से इन्कार किया गया था। हाई कोर्ट ने बीमा कंपनी को 11,62,266 रुपये का मुआवजा 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दो माह के भीतर अदा करने का निर्देश दिया है। यह मामला 30 अप्रैल 2015 को हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है। इसमें 70 वर्षीय बलवान की मौत हो गई थी। उनके शादीशुदा बेटे और बेटी ने मुआवजे की मांग की थी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 14, 2026, 05:41 IST
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