Delhi: होली से पहले नियम ताक पर, कानून जेब में रखकर जारी है निजी बसों की लूट; हर त्योहार का यही है 'रंग'
घर पहुंचने की मजबूरी में निकले यात्रियों की भीड़ को मौका मानकर दिल्ली के अंतरराज्यीय बस अड्डों पर निजी बस संचालकों की लूट खुलकर जारी है। ट्रेनों में कन्फर्म टिकट नहीं हैं और सरकारी बसें पहले से भरी चल रही हैं। ऐसे में मजबूर यात्रियाें से तय किराए के नाम पर मनमानी वसूली की जा रही है। आम दिनों के मुकाबले कई रूटों पर किराया दोगुना तक वसूला जा रहा है।घर जाने वाले यात्रियों का कहना है कि होली से पहले निजी बसों में नियम ताक पर हैं और कानून उनकी जेब में। नहीं चाहते हुए भी दोगुना किराया देना मजबूरी है वरना त्योहार परिजनों के साथ मना नहीं पाएंगे। बस अड्डे पर अपने परिवार के साथ खड़े यात्री अनिकेत ने बताया कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बस्ती के रहने वाले हैं और होली पर हर साल घर जाते हैं। इस बार ट्रेन में वेटिंग लिस्ट लंबी होने के कारण उन्हें बस से जाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि किराया बहुत ज्यादा है, लेकिन त्योहार पर घर जाना जरूरी है, इसलिए मजबूरी में पैसा देना पड़ रहा है। अन्य यात्री आशुतोष ने बताया कि ऑनलाइन टिकट नहीं मिलने पर वह सीधे बस अड्डे पहुंचे। यहां आकर पता चला कि किराया दोगुना लिया जा रहा है। बस अड्डों पर जुटे यात्रियों और चालकों से मिली जानकारी के अनुसार, लंबे रूटों पर किराया दोगुना तक कर दिया गया है। निजी वेबसाइटों और ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर भी किरायों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। ट्रैवल वेबसाइटों पर भी होली से पहले टिकट दरों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वेबसाइटों पर सामान्य दिनों की तुलना में 30 से 80 प्रतिशत तक किराया बढ़ा हुआ है। वहीं, कई रूटों पर सीटें सोल्ड आउट दिख रही हैं। दिल्ली से वाराणसी, लखनऊ और कानपुर का किराया सामान्य दिनों में 700 से 1200 के बीच है जबकि निजी बस चालक 1500 से 2000 रुपये तक वसूल रहे हैं।जयपुर और हरिद्वार के लिए 1000 से 1300 रुपये तक किराया लिया जा रहा है। आम दिनों में यह किराया लगभग 500 से 800 रुपये होता है। दिल्ली से पटना के लिए 2000 से 3500 रुपये प्रति सीट तक वसूले जा रहे हैं जबकि मथुरा का किराया 1200 रुपये तक मांगा जा रहा है। भीड़ के कारण बढ़ा रहे किराया निजी बस चालक रानू ने बताया कि होली के कारण बसों में भीड़ है। उन्होंने बताया कि सीटों की मांग बहुत ज्यादा है। कई बार हमें अतिरिक्त स्टाफ और अतिरिक्त फेरे लगाने पड़ते हैं। डीजल की कीमतें भी बढ़ी हैं, इसलिए किराया थोड़ा बढ़ाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि आगे किराये में और बढ़ोतरी हो सकती है। कुछ बस ऑपरेटरों ने यह भी बताया कि त्योहार के दौरान मांग और आपूर्ति के आधार पर किराया तय होता है। भीड़ से बढ़ रही अव्यवस्था आनंद विहार और सराय काले खां बस अड्डों पर लंबी कतारें, सामान के साथ खड़े परिवार और टिकट के लिए होड़ का दृश्य साफ दिखाई दे रहा है। कई यात्री घंटों से बस का इंतजार कर रहे हैं। यात्रियों के मुताबिक, सुरक्षा और सुविधा दोनों प्रभावित हो रही हैं। महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। होली जैसे बड़े त्योहार पर घर जाने की खुशी किराये की मार के कारण फीकी पड़ती नजर आ रही है। लोग अतिरिक्त पैसा खर्च कर रहे हैं ताकि समय पर अपने गांव और शहर पहुंच सकें। यात्रियों के अनुसार, सरकार और परिवहन विभाग को त्योहारों के दौरान विशेष व्यवस्था करनी चाहिए। यात्री शिवी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए बताया कि जब हर साल होली, दिवाली और छठ जैसे पर्व पर भीड़ बढ़ती है, तो पहले से तैयारी क्यों नहीं की जाती। अभी तो होली में 6 दिन बाकी है, धीरे-धीरे हालात और खराब होने वाले है। त्योहार की खुशियां तभी पूरी होंगी जब सफर आसान और सुलभ होगा। फिलहाल, घर जाने की जल्दी में यात्री महंगे टिकट खरीदने को मजबूर हैं और बस अड्डों पर भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 27, 2026, 02:13 IST
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