नशे के नेटवर्क की जांच के लिए हिरासत में पूछताछ जरूरी : कोर्ट
धर्मशाला। विशेष न्यायाधीश देहरा सपना पांडे की अदालत ने 15 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामदगी से जुड़े एक मामले में आरोपी महिला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एनडीपीएस अधिनियम के मामलों में विशेषकर जब जांच प्रारंभिक चरण में हो और मादक पदार्थ के स्रोत व नेटवर्क का पता लगाना हो तो आरोपी से हिरासत में पूछताछ अनिवार्य है।पुलिस थाना रक्कड़ के तहत निहारी गांव की एक महिला के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21 एवं 29 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस को 27 मई को गुप्त सूचना मिली थी कि महिला अपने घर में नशीला पदार्थ छिपाकर रखे हुए है। दबिश के दौरान घर बंद होने पर पुलिस ने उसकी बेटियों की मौजूदगी में तलाशी ली, जिसमें रसोई के साथ बने बाथरूम की छत से 15 ग्राम चिट्टा बरामद हुआ। चिट्टा बरामदगी के बाद से ही आरोपी महिला पुलिस गिरफ्त से बाहर चल रही है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि वह चार बच्चों की मां है और उसे मामले में झूठा फंसाया गया है। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी फरार है और नशे के कारोबार के तार कहां तक जुड़े हैं, यह जानने के लिए उससे गहन पूछताछ जरूरी है।अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि नशे का कारोबार युवाओं के भविष्य को तबाह कर रहा है। अदालत ने टिप्पणी की कि एनडीपीएस के मामलों में अग्रिम जमानत सामान्य रूप से नहीं दी जा सकती। मामले की गंभीरता और जांच के हित को देखते हुए अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निपटारे के लिए हैं और इनका मुख्य मुकद्दमे के निर्णय पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 08, 2026, 20:22 IST
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