Kangra News: दुकान के मालिकाना हक पर कोर्ट की मुहर, मालिक को 14 साल बाद राहत
धर्मशाला। पालमपुर मुख्य बाजार में स्थित एक दुकान और रिहायशी परिसर को लेकर 14 वर्षों से चल रहा विवाद समाप्त हो गया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश पालमपुर ने याची की अपील को खारिज कर निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। इस फैसले के साथ ही अब व्यक्ति को न केवल दुकान और परिसर खाली करना होंगे, बल्कि 5.40 लाख रुपये उपयोग और कब्जा शुल्क के रूप में मालिक को अदा करने होंगे।यह मामला वर्ष 2012 में सामने आया था, जब दुकान की मालकिन ने अदालत में दावा किया था कि मूल किरायेदार दंपत्ति की मृत्यु के बाद परिसर खाली पड़ा था। इस दौरान एक व्यक्ति ने स्वयं को उन दंपत्ति का दत्तक (गोद लिया) पुत्र बताते हुए दुकान और परिसर पर कब्जा कर लिया। बचाव पक्ष ने अपने दावे को मजबूत करने के लिए बिजली बिल, गैस कनेक्शन, मतदाता सूची और एक पंजीकृत गोदनामा कोर्ट में पेश किया था।अदालत ने सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष द्वारा पेश किया गया गोदनामा ही उसके खिलाफ सबसे बड़ा साक्ष्य साबित हुआ। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को 1982 में गोद लेने का दावा किया गया था, जबकि उस समय उसकी वास्तविक आयु 26 वर्ष थी। हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम 1956 के कानूनी प्रावधानों के अनुसार 15 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति को गोद लेने के लिए किसी विशेष परंपरा या प्रथा का प्रमाण देना अनिवार्य है, जिसे आरोपी साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।अतिरिक्त जिला न्यायाधीश धीरू ठाकुर ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि केवल पंजीकृत गोदनामा होने भर से कोई कब्जा वैध नहीं हो जाता। इसलिए आरोपी को कानूनी रूप से दत्तक पुत्र नहीं माना जा सकता और न ही उसे किरायेदारी के कोई अधिकार प्राप्त हो सकते हैं। अदालत ने निचली अदालत द्वारा 1 फरवरी 2009 से 31 जनवरी 2012 तक की अवधि के लिए तय किए गए 500 रुपये प्रतिदिन यानी कुल 5.40 लाख रुपये के मुआवजे को पूरी तरह उचित ठहराया। अदालत ने कहा कि मुख्य बाजार जैसी व्यावसायिक जगह के लिए यह राशि बिल्कुल भी असंगत नहीं है। इस फैसले के साथ ही आरोपी को अब तक मिली राहत (अंतरिम स्थगन आदेश) भी समाप्त हो गई है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 09, 2026, 18:01 IST
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