हाईकोर्ट : अस्पताल के रिकॉर्ड में कोविड की पुष्टि तो मुआवजा देना पड़ेगा, सोनभद्र के डीएम का आदेश रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड में कोरोना से मौत का कारण दर्ज है तो केवल आरटी-पीसीआर रिपोर्ट नहीं होने पर मुआवजे से इन्कार नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने सोनभद्र के डीएम का आदेश रद्द कर याची अर्चना सिंह को 50 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता देने का आदेश दिया है। अर्चना सिंह के पति रवींद्र सिंह उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की ओबरा तापीय विद्युत परियोजना में जूनियर इंजीनियर थे। कोरोना के दौरान ड्यूटी करते समय उनकी तबीयत बिगड़ी थी। उन्हें 28 अप्रैल 2021 को सोनभद्र के लोढ़ी स्थित कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के रिकॉर्ड में उनकी एंटीजन जांच पॉजिटिव दर्ज थी। उपचार के दौरान पांच मई 2021 को उनकी मौत हो गई थी। मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड में कोविड-19 वायरल निमोनिया को कारण बताया गया था। परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक ने मृतक की पत्नी को 50 लाख रुपये की सहायता देने की संस्तुति की थी। जिला प्रशासन ने भी भुगतान की मंजूरी दी थी। डीएम ने 16 नवंबर 2021 को आरटी-पीसीआर रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने के आधार पर दावे को खारिज कर दिया था, जिसे याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने कहा कि सरकारी योजना में एंटीजन जांच समेत अन्य निर्धारित साक्ष्यों को भी मान्यता दी गई है। ऐसे में अस्पताल के रिकॉर्ड को नजरअंदाज कर मुआवजा रोकना उचित नहीं है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 28, 2026, 10:16 IST
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