कोरोना : मुंबई के इस अस्पताल ने कराए 700 संक्रमित महिलाओं के प्रसव, दुनिया के लिए बना मिसाल

कोरोना काल में तमाम समस्याओं के बीच सुरक्षित प्रसव बनी चुनौती बनकर उभरा है। ऐसे माहौल में नवजात और मां दोनों की सेहत की चिंताओं के बीच मुंबई के एक अस्पताल ने 700 संक्रमित महिलाओं के प्रसव करवाकर मिसाल कायम की है। खास बात यह है कि इनमें से 41 नवजात कोरोना पॉजिटिव हुए हैं। वहीं महिलाओं में गर्भपात या मृत शिशु जन्म के मामले भी नहीं बढ़े हैं। दक्षिण मुंबई की वीवाईएल नायर चैरिटेबल अस्पताल दुनिया के लिए नजीर बन गया है। केवल भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों ने गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराया है। यही कारण है कि यहां मिले अनुभव ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। संक्रमित गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशु को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है, इसे जानने में मदद मिल रही है। 99 साल पुराना सरकारी अस्पताल बता रहा है कि इस दौरान क्या सावधानी बरतनी चाहिए। नायर अस्पताल में हर साल 4,000 प्रसव कराए जाते हैं। महामारी के दौरान जब यहां पहली संक्रमित गर्भवती महिला भर्ती हुई तो उस समय 100 के करीब गैर संक्रमित महिलाएं भर्ती थीं। स्त्री रोग विशेषज्ञ नीरज महाजन के अनुसार अस्पताल के लिए इन महिलाओं को संक्रमण से बचाना बड़ी चुनौती थी। इसके लिए एक अलग लेबर बार्ड, तत्काल विभिन्न उपकरण और ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की गई थी। 19 अस्पतालों में 1,100 गर्भवती गर्भवती संक्रमित महिलाओं पर अध्ययन के लिए बने प्रैगकोविड रजिस्ट्री अभियान में देश के 19 अस्पतालों की 1,100 गर्भवती पंजीकृत हैं, जिनमें से आधे से ज्यादा नायर अस्पताल की हैं। मोबाइल की फ्लैशलाइट मेंपहला प्रसव 14 अप्रैल को स्त्री रोग रेजिडेंट डॉ. सायला श्रीवास्तव ने नए वार्ड में कोविड-19 संक्रमित का पहला प्रसव करवाया। तब लेबर रूम में ओवरहेड तक नहीं थी। प्रसव कराते समय तात्कालिक इंतजाम कर डॉ. श्रीवास्तव ने मोबाइल की फ्लैशलाइट नर्स को पकड़ा दी और सफल प्रसव कराया। फेस शील्ड पर भाप जम गई अपनी सुरक्षा को खतरे में डालकर उसे हटाना पड़ा। 20 साल की प्रसूना हिना पटेल बताती हैं कि वह इस बात से बहुत चिंतित थी वायरस की वजह से उन्हें या उनके बच्चे को कोई नुकसान ना हो जाए। नायर अस्पताल में अस्थाई वार्ड तीन हफ्ते पहले बना, यहां 40 प्रसव कराए गए। 9-9 अस्पताल भटकते पहुंचीं प्रसूताएं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष गणेश शिंदे के मुताबिक, संक्रमित गर्भवती महिलाएं औसतन चार अस्पतालों में भर्ती ना किए जाने के बाद पहुंच रही हैं। एक महिला को नौ अस्पतालों ने भर्ती करने के मना कर दिया। इसी के कारण आठ महिलाओं और उनके बच्चे की जान बचाना मुश्किल हो गया। अनुभव जो अब हैं अनुकरणीय डॉक्टरों के मुताबिक, संक्रमण से महिलाओं में गर्भपात या मृत शिशु जन्म के मामले नहीं बढ़े हैं। संक्रमित मां से जन्मे शिशु को बाकी के मुकाबले ज्यादा समय आईसीयू में रखा गया। समय पूर्व प्रसव या आईसीयू में शिशु की मृत्युदर, गैर संक्रमित मामलों के बराबर ही रही। पता करना संभव नहीं हुआ कि नवजात में संक्रमण मां से हुआ है या किसी और से। चिकित्साकर्मियों में संक्रमण की संभावना सुरक्षा के चलते घटी। दस स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हुए, जो अब ठीक हो चुके हैं।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 18, 2020, 07:57 IST
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