Video: गोंडा...अयोध्या से लौटते समय यहां रुके थे भोलेनाथ, दृष्टि मात्र से पूरी होती हैं मनोकामनाएं
गोंडा के मध्य स्थित दुखहरण नाथ मंदिर का इतिहास त्रेता युग से जुड़ा माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव अयोध्या में भगवान राम के जन्मोत्सव के दर्शन कर लौटते समय यहां ठहरे थे। तभी से यह स्थल दुखहरण नाथ के नाम से विख्यात हो गया। कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से पूजन-अर्चन करने पर भोलेनाथ भक्तों के दुख हर लेते हैं। मंदिर की भव्य प्राचीर और दोनों ओर बनी छोटी प्राचीर इसकी सुंदरता को और आकर्षक बनाती हैं। कजली तीज के अवसर पर यहां भव्य मेला भी लगता है। मंडल मुख्यालय में कोतवाली और जिला अस्पताल के बीच, स्टेशन रोड पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचना आसान है। रेलवे स्टेशन व बस अड्डे से टेंपो, रिक्शा या निजी साधन से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर के महंत रुद्रनारायण गिरि बताते हैं कि यह स्थल भगवान शिव के अयोध्या आगमन से जुड़ी आस्था का प्रतीक है और यहां स्थापित शिवलिंग अत्यंत प्राचीन है। हर सोमवार को तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। भक्त जलाभिषेक के साथ रुद्राभिषेक भी कराते हैं। श्रद्धालु मनोज मिश्र का कहना है कि सच्ची श्रद्धा से की गई आराधना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 14, 2026, 07:49 IST
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