VIDEO: पुलिस ने बना दिया लुटेरा, 41 साल बाद दोनों आरोपी बरी

आगरा के इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आगरा में 41 साल पुराने लूट के एक मामले में फैसला सुनाते हुए थाना लोहामंडी क्षेत्र के रामनगर निवासी लखन सिंह और रमेश को बरी कर दिया। अदालत ने वर्ष 1987 में ट्रायल कोर्ट की ओर से दी गई तीन साल की सजा के आदेश को रद्द करते हुए आरोपियों को संदेह का लाभ दिया है। न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की पीठ ने माना कि पुलिस की ओर से बताई गई गिरफ्तारी और बरामदगी की कहानी संदेहास्पद है। घटना 12 फरवरी 1984 की है। शाहगंज थाना क्षेत्र के अयोध्या कुंज निवासी जितेंद्र कुमार आगरा कैंट से टूंडला के लिए ट्रेन में बैठे थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि आगरा कैंट और राजा की मंडी स्टेशन के बीच दो युवकों ने चाकू की नोक पर उनकी एचएमटी घड़ी और 125 रुपये की नकदी लूट ली। दोनों युवक चलती ट्रेन से कूदकर भाग गए। पुलिस ने घटना के महज 45 मिनट के अंदर लखन सिंह और रमेश को आरोपियों के रूप में गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से चाकू बरामद करने का दावा किया था। आगरा की एडीजे विशेष डकैती कोर्ट ने 21 फरवरी 1987 को दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई। सजा के खिलाफ लखन और रमेश ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने विश्लेषण के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। कोर्ट में पुलिस का दावा था कि उन्होंने 3-5 किमी दूर पैदल जाकर आरोपियों को 45 मिनट में पकड़ लिया, जिसे कोर्ट ने असंभव करार दिया। साथ ही आरोपियों के पास से चाकू तो मिले लेकिन लूटी गई घड़ी और पैसे बरामद नहीं हुए। कोर्ट ने कहा कि यदि उनके पास सामान फेंकने का समय था तो वे चाकू भी फेंक सकते थे। पीड़ित जितेंद्र कुमार ने नाक पर चोट और खून बहने की बात कही थी लेकिन रिकॉर्ड पर कोई मेडिकल रिपोर्ट मौजूद नहीं थी। अदालत ने बचाव पक्ष के गवाहों की इस बात में दम माना कि आरोपियों को उनके घर से उठाकर फर्जी तरीके से फंसाया गया था।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 25, 2025, 12:38 IST
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