Mandi: नेरचौक में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के खिलाफ किसान सभा का विरोध

स्मार्ट बिजली मीटर के संबंध में उपभोक्ताओं के लिए आयोजित जागरूकता शिविर में शुक्रवार को किसानों और उपभोक्ताओं ने कई गंभीर सवाल उठाते हुए प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की योजना का विरोध जताया। बिजली बोर्ड के अधिकारियों की ओर से आयोजित इस शिविर में योजना के आर्थिक, तकनीकी व सामाजिक पहलुओं पर चर्चा की। शिविर के दौरान किसान सभा की बल्ह इकाई के उपाध्यक्ष परस राम ने सवाल उठाते हुए कहा कि स्मार्ट मीटरिंग योजना पर लगभग 2500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। जबकि अंततः इसका आर्थिक भार बिजली बिलों के माध्यम से आम उपभोक्ताओं पर डाला जाएगा। किसान सभा ने इसी आधार पर योजना के तहत प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने का पूर्ण विरोध करते हुए इसे तुरंत बंद करने की मांग की। महिला समिति की ओर से कांता शर्मा ने कहा कि बिजली अधिनियम-2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं से पूर्व सहमति नहीं ली जा रही है और उलटे जुर्माने की चेतावनी दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटरिंग लागू होने से बिजली बोर्ड में कर्मचारियों की संख्या घटेगी, जिससे युवाओं के रोजगार के अवसर कम होंगे। साथ ही सुबह और शाम के समय बिजली दरों के अधिक होने की आशंका जताते हुए उन्होंने बिजली क्षेत्र के निजीकरण का विरोध करने की बात कही। किसान सभा के उपाध्यक्ष जोगिंद्रर वालिया ने कहा कि स्मार्ट मीटर के माध्यम से उपभोक्ताओं के बिजली उपयोग का डेटा निजी कंपनियों तक पहुंच सकता है, जिससे गोपनीयता और सुरक्षा से जुड़े खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था बिजली क्षेत्र को निजीकरण की दिशा में ले जाएगी और भविष्य में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 13, 2026, 14:42 IST
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