Ambala News: पेंशन नहीं मिलने से प्राण वायु योजना के निकल रहे प्राण

अंबाला सिटी। सरकार ने प्राणवायु देवता योजना के जरिए बुजुर्ग पेड़ों को पेंशन देने का निर्णय लिया था। इसके लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में ऐसे पेड़ चिह्नित किए गए जिनकी आयु 75 वर्ष या इससे अधिक है। पर पेंशन न मिलने से प्राण वायु योजना प्राण विहीन साबित हो रही है। अंबाला में भी पिछले वर्ष ऐसे 19 पेड़ों को चिह्नित किया गया था। इनकी देखभाल कर रहे लोगों को उम्मीद थी कि वन विभाग पेंशन की राशि जारी करेगा तो पेड़ों का अच्छी तरह से ध्यान रखा जा सकेगा। उनका कहना है कि प्राणवायु देवता योजना के तहत आने वाले पेड़ों को दो साल से पेंशन तक नहीं मिली। यह पेंशन पेड़ों की देखभाल करने वालों को मिलनी थी ताकि वह वर्षभर पेड़ का ध्यान रख सकें। अब हालात यह हैं कि लाभार्थी सरकारी फोन का इंतजार कर रहे हैं। इसमें कुछ पंड़ तो काफी बुजुर्ग भी हो चुके हैं। डीएफओ नरेश कुमार ने बताया कि पिछले साल चयनित वृक्षों की पेंशन आनी है।क्या है प्राणवायु देवता योजना : प्राणवायु देवता योजना हरियाणा सरकार की ओर से शुरू की गई पर्यावरण-हितैषी योजना है। इस योजना के तहत इंसानों की तरह ही 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पेड़ों को पेंशन दी जाती है। भारत में इस तरह की यह पहली योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के पुराने और विशाल पेड़ों का संरक्षण करना और पर्यावरण को बढ़ावा देना है। योजना की शुरुआत में प्रति पेड़ 2,500 रुपये सालाना देने का प्रावधान था, जिसे बाद में बढ़ाकर लगभग 2,750 से 3,000 रुपये प्रति वर्ष तक कर दिया गया है। यह राशि हर साल उसी तरह बढ़ती है जैसे हरियाणा में वृद्धावस्था सम्मान भत्ता (बुढ़ापा पेंशन) की राशि बढ़ाई जाती है। यह पैसा सीधे पेड़ के मालिक, उसकी देखभाल करने वाले व्यक्ति, संस्था, या गांव की ग्राम पंचायत के बैंक खाते में भेजा जाता है।कौन से पेड़ इसके पात्र हैंn पेड़ की उम्र 75 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।n पेड़ पूरी तरह स्वस्थ और जीवित होना चाहिए (सूखे, खोखले या गिरे हुए पेड़ों को इसमें शामिल नहीं किया जाता)।n इसमें पीपल, बरगद, नीम, आम, जाल, गूलर और पिलखन जैसी करीब 40 प्रजातियों के पारंपरिक भारतीय पेड़ शामिल हैं, जो भारी मात्रा में ऑक्सीजन देते हैं।n वन भूमि पर उगे पेड़ इस योजना के दायरे में नहीं आते हैं। यह निजी जमीन, पंचायतों या सरकारी संस्थानों की जमीनों पर खड़े पेड़ों के लिए है।100 साल पुराने पेड़ को नहीं मिली पेंशन लखनौरा गांव के रामकरन का कहना है कि उनके आंगन में एक पीपल का पेड़ है। इस पेड़ की उम्र 100 साल की होगी। यह हमारे दादा गुरमुख सिंह ने लगाया था। उनके बाद पिता और अब वह देखभाल कर रहे हैं। दो साल से पेड़ की पेंशन का इंतजार कर रहा हूं।150 पुराना है बरगद का पेड़ नारायणगढ़ के मुगल माजरा गांव में 150 वर्ष पुराने बरगद के पेड़ की देखभाल सुभाष चंद का परिवार कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह पेड़ दादा तुलाराम ने लगाया था। वह कहकर गए थे कि इस पेड़ को कभी नहीं काटना। यह पेड़ खेतों के पास लगा हुआ है। नारायणगढ़ के लखनौरा गांव में रामकरण पीपल के वृक्ष के साथ

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 12, 2026, 02:35 IST
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Ambala News: पेंशन नहीं मिलने से प्राण वायु योजना के निकल रहे प्राण #The'PranVayuYojana'IsGaspingForBreathDueToTheNon-receiptOfPensions. #SubahSamachar