Panipat News: देश सेवा में नौल्था के वीरों की धाक, सरहद से खेल के मैदान तक लहराया परचम

पानीपत। पानीपत-रोहतक नेशनल हाईवे पर स्थित ऐतिहासिक गांव नौल्था केवल अपनी खास भौगोलिक स्थिति के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी माटी के वीरों के अदम्य शौर्य, सर्वोच्च बलिदान और खेल के मैदान में गाड़े गए झंडों के लिए भी जाना जाता है। नौल्था को बहादुरों और खिलाड़ियों का गांव कहा जाता है। इस गांव के बेटों ने मां भारती की रक्षा के लिए कभी कदम पीछे नहीं हटाए और जब बात खेल के मैदान की आई तो अपनी प्रतिभा के दम पर दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया।वर्तमान में इस गांव के करीब 150 पूर्व सैनिक यहां की बहादुरी के जीवंत गवाह हैं, जबकि करीब 125 युवा आज भी देश की विभिन्न सीमाओं पर मुस्तैद रहकर देश की रक्षा कर रहे हैं। इसके साथ ही, गांव के दो दर्जन से अधिक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा फहरा चुके हैं।बाॅक्सपीढ़ी दर पीढ़ी देश सेवा का अनूठा जज्बागांव में देशभक्ति और सेना के प्रति रुझान का इतिहास बेहद समृद्ध और पुराना है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के हरदेवा सिंह पंजाब रेजिमेंट में शामिल थे और उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में अदम्य साहस दिखाया था। उनके बाद कर्मबीर आजादी के बाद गठित हुई ''बच्चा पलटन'' में भर्ती हुए और सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए। इनके बाद से गांव के युवाओं में सेना में जाने की जो अलख जगी, वह आज भी निरंतर जारी है।नौल्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां सेना की नौकरी केवल एक रोजगार नहीं, बल्कि एक पारिवारिक परंपरा बन चुकी है। गांव में अब दूसरी और तीसरी पीढ़ी लगातार सेना में जाकर देश की कमान संभाल रही है। सूबे सिंह के तीन बेटे लालचंद, बलबीर सिंह और तेजबीर सिंह सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं और अब तेजबीर के बेटे बिजेंद्र सेना में रहकर इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इसी तरह सिग्नल कोर से सेवानिवृत्त धर्मबीर सिंह के बेटे अमित भी वर्तमान में सिग्नल कोर में तैनात हैं।बाॅक्स1965 की जंग: दो दिन के भीतर दो रणबांकुरों ने दिया था सर्वोच्च बलिदाननौल्था गांव के इतिहास में साल 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध बेहद भावुक और गौरवशाली अध्याय है। इस युद्ध के दौरान गांव के दो जांबाजों ने महज दो दिनों के अंतर में देश की खातिर अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। राज राइफल्स में तैनात लांस नायक महा सिंह ने 20 सितंबर 1965 को दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहादत पाई। इस सदमे और गर्व के बीच, महज दो दिन बाद 22 सितंबर 1965 को जाट रेजिमेंट के वीर जवान रामकिशन ने भी मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। इनके अलावा आजादी की लड़ाई के दौरान गांव के रामसिंह वाल्मीकि और रामस्वरूप ने आजाद हिंद फौज में रहकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की आजादी की लड़ाई लड़ी थी।खेलों के मैदान में भी गाड़े झंडे, वर्ल्ड पुलिस गेम्स से एशियन गेम्स तक जमाई धाकसरहद के साथ-साथ नौल्था गांव का परचम खेलों की दुनिया में भी बुलंदियों पर है। गांव के करीब 30 से अधिक युवाओं ने खेलों के शानदार प्रदर्शन के दम पर सरकारी नौकरियां हासिल की हैं। अमेरिका में आयोजित वर्ल्ड पुलिस गेम्स में गांव की नीतू जागलान ने कराटे स्पर्धा में डबल गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा। नीतू वर्तमान में सीआईएसएफ में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं। पहलवान सागर जागलान का चयन कुश्ती प्रतियोगिता में एशियन गेम्स (एशियाड) के लिए हुआ है। दलजीत सिंह ने अमेरिका में आयोजित आर्म्स रेसलिंग प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया। वे वर्तमान में हरियाणा पुलिस में एएसआई के पद पर सेवारत हैं। कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार के विशेष सहयोग और प्रोत्साहन से गांव के एक दर्जन से अधिक खिलाड़ी प्रो-कबड्डी लीग में शामिल होकर मैट पर अपना जलवा बिखेर रहे हैं।कोट्स फोटो नौल्था की मिट्टी में ही देशभक्ति और खेल रचे-बसे हैं। हमारे गांव के बुजुर्गों ने जो अनुशासन और देशभक्ति का रास्ता दिखाया था, आज की युवा पीढ़ी भी उसी पर चल रही है। हमें अपने गांव के सैनिकों और खिलाड़ियों पर बेहद गर्व है।- खिलार सिंह जागलान कोट्स फोटो गांव के युवाओं का झुकाव शुरू से ही सेना, पुलिस और खेलों की तरफ रहा है। आज गांव के युवा न सिर्फ सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि प्रो-कबड्डी और एशियन गेम्स जैसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गांव का नाम चमका रहे हैं।- पवन जागलानकोट्स फोटो 1965 के युद्ध में हमारे गांव के दो शूरवीरों महासिंह और रामकिशन का बलिदान आज भी युवाओं को प्रेरणा देता है। हमारी आने वाली पीढ़ियां भी देश सेवा और खेल के क्षेत्र में इसी तरह गांव और देश का मान बढ़ाती रहेंगी।- दीपचंद चौहान कोट्स फोटोसेना की वर्दी पहनना और देश के लिए खेलना हमारे गांव के युवाओं का सबसे बड़ा सपना होता है। गांव की डाट होली जैसे त्योहार हमारी आपसी एकजुटता को दर्शाते हैं। यही भाईचारा तथा अनुशासन हमारे बच्चों को हर क्षेत्र में सफलता दिलाता है। -मास्टर कर्मवीर सिंह कोट्स फोटो नाैल्था गांव का इतिहास हमेशा से ही शौर्य और बलिदान का रहा है। हमारे गांव के युवाओं में देश सेवा और खेलों का ऐसा जुनून है कि हर घर से कोई न कोई सीमा पर तैनात है या मैदान में पसीना बहा रहा है। ग्रामीण नौजवानों को लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं। -जितेंद्र जागलान

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 25, 2026, 06:03 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




Panipat News: देश सेवा में नौल्था के वीरों की धाक, सरहद से खेल के मैदान तक लहराया परचम #TheHeroesOfNaulthaMakeTheirMarkInTheServiceOfTheNation;TheyHaveHeldTheBannerHighFromTheBordersToTheSportsArena. #SubahSamachar