सुप्रीम कोर्ट: नौ दिन में 3000 KM पहुंचा हाथी, अदालत चिंतित; स्वतंत्रता सेनानी की पेंशन के दावे पर अहम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बंदी हाथियों को एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित करने में जल्दबाजी पर चिंता जताते हुए कानूनी प्रक्रियाओं और पूर्व निर्देशों के पालन पर जोर दिया है। बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हाथियों की पहचान, मालिकाना हक, परिवहन और उनके साथ उचित व्यवहार सुनिश्चित करने को कहा। पीपल फॉर कैटल इन इंडिया की याचिका पर सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने बताया कि एक हाथी को महज नौ दिन में करीब 3,000 किलोमीटर दूर चेन्नई पहुंचा दिया गया। जबकि दूसरे राज्य में हाथी भेजने के लिए सत्यापन, मंजूरी और संबंधित पक्षों से परामर्श जैसी प्रक्रियाओं में कम से कम 50 दिन लगते हैं। पीठ ने कहा कि हाथियों का स्थानांतरण हो चुका है, इसलिए फिलहाल उनकी वापसी का आदेश नहीं दिया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जल्दबाजी में हुई कार्रवाई की जानकारी पहले मिलती तो अदालत इसे रोक देती। पीठ ने याचिकाकर्ता को मौजूदा कार्यवाही में उचित आवेदन दाखिल करने की छूट देते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। नौ दिन में पूरा हुआ स्थानांतरण अरोड़ा के मुताबिक, हाथी को चेन्नई भेजने का अनुरोध 4 सितंबर को किया गया और वह 13 सितंबर तक वहां पहुंच गया। उन्होंने कहा कि इतनी जल्दी सभी कानूनी प्रक्रियाएं कैसे पूरी हुईं। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को केवल लंबित आवेदन पर फैसला लेने को कहा था, स्थानांतरण का आदेश नहीं दिया था।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 06, 2026, 01:57 IST
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