अपनों ने दिया दर्द: ऐसा ठुकराया कि याद करते हैं तो रूकते नहीं आंसू, सिसक रहीं बुजुर्गों की खुशियां
जिस घर को अपने खून-पसीने से सींचा, आज उसी घर की चौखट पर हमारे लिए जगह नहीं बची। ऐसा ठुकराया अपनों ने कि जब भी उनकी याद आती है, तो आंखें रो पड़ती हैं। यह दर्द अलीगढ़ के छर्रा स्थित वृद्धाश्रम में रह रहे उन बुजुर्गों का है, जिनकी ढलती उम्र में सहारा बनने के बजाय अपनों ने ही उन्हें बेगाना कर दिया। हर साल 15 जून को विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बुजुर्गों के साथ होने वाले शारीरिक, मानसिक और आर्थिक दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना है, लेकिन इस तेज गति से भागते समाज की कड़वी सच्चाई यह है कि आज कई बुजुर्ग दुनिया से नहीं, बल्कि अपने ही बच्चों के दुर्व्यवहार और उपेक्षा के शिकार हैं। वर्तमान में इस वृद्धाश्रम में ऐसे ही 80 बुजुर्ग पंजीकृत हैं, जो अपनों के दिए जख्मों को समेटे जिंदगी के आखिरी दिन काट रहे हैं। अलीगढ़ की 45 लाख से अधिक आबादी में पांच लाख से अधिक आबादी बुजुर्गों की है। इनमें से करीब 20 हजार बुजुर्ग परिवार परिचितों की किसी न किसी रूप में उपेक्षा या खराब व्यवहार को झेल रहे हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 15, 2026, 13:44 IST
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