Yamuna Nagar News: सोलर गीजर धमाके से खुली पोल, निर्माण गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल
यमुनानगर। सिविल सर्जन कार्यालय की तीसरी मंजिल की छत पर लगे सोलर वाटर गीजर में हुए धमाके ने भवन की निर्माण गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्यालय में कार्यरत डॉक्टरों और स्टाफ का कहना है कि वर्ष 2023 से जब से वे इस भवन में बैठ रहे हैं, तब से छत पर लगाए गए सोलर वाटर गीजर कभी चले ही नहीं। इन गीजरों से न तो किचन में गर्म पानी आया और न ही किसी शौचालय में। ऐसे में अब इनके फटने की घटना के बाद इनकी क्वालिटी और इंस्टॉलेशन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।गौरतलब है कि करीब 105 करोड़ रुपये की लागत से बने 200 बेड के पांच मंजिला मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल के दो ब्लॉक और सिविल सर्जन कार्यालय का उद्घाटन 11 मई 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया था। उद्घाटन के बाद से ही इस अत्याधुनिक बताए गए भवन में लगातार खामियां सामने आ रही हैं। डीसी के साथ भी पीडब्ल्यूडी व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। जिसमें इस बात पर हैरानी जताई गई कि एक धमाका होने से रेलिंग के बीम उखड़ कर जमीन पर आ गिरे। ऐसे में निर्माण सामग्री पर सवाल उठने लाजमी हैं।13 मार्च 2024 से लेकर जनवरी 2026 तक जिला अस्पताल और सिविल सर्जन कार्यालय भवन की बाहरी दीवारों, शौचालयों और फर्श पर लगी टाइलें 12 बार गिर चुकी हैं। इन घटनाओं में कई मरीजों को चोटें आई हैं, वहीं उनके दोपहिया और चारपहिया वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के कारण अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों, उनके तीमारदारों के साथ-साथ ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और कर्मचारियों में डर का माहौल बना हुआ है। डॉक्टरों और स्टाफ का कहना है कि टाइलें गिरने की घटनाएं किसी बड़े हादसे का संकेत हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे। टाइलों में इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने के लिए मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल प्रशासन की ओर से कई बार लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को पत्र लिखे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए एडीसी स्वयं भी अस्पताल का निरीक्षण कर चुके हैं, इसके बावजूद समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।भवन की अन्य खामियां भी आए दिन सामने आ रही हैं। कभी अस्पताल की सीवरेज लाइन जाम हो जाती है, तो कभी शौचालयों के गंदे पानी की निकासी के लिए लगाए गए पाइप छत के नीचे से निकाले जाने की बात सामने आई है। इन पाइपों को छिपाने के लिए ऊपर फॉल सीलिंग लगा दी गई है। कई बार पाइप जाम होने से गंदा पानी डॉक्टरों के केबिन और मरीजों के वार्ड में टपकने लगता है, जिससे न केवल दुर्गंध फैलती है बल्कि संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। सोलर गीजर धमाके की घटना के बाद अब एक बार फिर यह मांग उठने लगी है कि पूरे भवन की निर्माण गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए।-----वर्जन:अस्पताल के भवन में जो कमियां थी उसके बारे में बहुत पहले से ही पीडब्ल्यूडी को लिखा हुआ है। एक के बाद एक नई कमी सामने आ रही है। यह मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में भी है।- डॉ. जितेंद्र सिंह, सिविल सर्जन, यमुनानगर। सिविलसर्जनकार्यालयमेंसोलरवाटरगीजरमेंब्लास्टहोनेपरजांचकरनेपहुंचेपीडब्ल्यूडीएक्सईए
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 05, 2026, 03:04 IST
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