बच्चों की हर जिद पर न कहें 'हां': आपकी 'ना' उन्हें बनाएगी भावनात्मक रूप से मजबूत, शोध में हुआ खुलासा
अगर आप बच्चे की हर मांग पर 'हां' कर देते हैं, तो यह उसके मानसिक विकास के लिए ठीक नहीं है। विकासात्मक मनोविज्ञान और तंत्रिका विज्ञान के शोध बताते हैं कि बच्चों को 'ना' कहना उन्हें भावनाओं पर नियंत्रण रखना और निराशा से निपटना सिखाता है। इससे वे उचित सीमाओं को समझते हैं और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित करते हैं। बचपन के शुरुआती वर्षों में सीखे गए भावनात्मक नियंत्रण के कौशल का असर जीवनभर रहता है। ये कौशल बच्चों को चुनौतियों से निपटने, बेहतर रिश्ते बनाने और स्कूल में अच्छा प्रदर्शन करने में मदद करते हैं। एजेंसी भावनात्मक नियंत्रण और सीमाओं का महत्व भावनात्मक नियंत्रण का अर्थ मुश्किल भावनाओं से बचना नहीं, बल्कि उन्हें महसूस करना, समझना और धीरे-धीरे संभालना सीखना है। बच्चे निराशा, हताशा, उत्साह और इंतजार जैसे अनुभवों से गुजरकर ये कौशल विकसित करते हैं। इसमें माता-पिता और अन्य भरोसेमंद वयस्कों की भूमिका अहम होती है। ये भी पढ़ें:इस्राइल के राजनीति समीकरण: सरकार गठन पर असमंजस बरकरार, राष्ट्रपति हर्जोग ने कहा- आंकड़ों सेस्थिति स्पष्ट नहीं बच्चों को 'ना' कहने के भी होते हैं सही तरीके छोटे बच्चों को 'ना' कहते समय स्पष्ट और आत्मविश्वास से जवाब दें। इसे मोलभाव का विषय न बनाएं, लेकिन उनकी भावनाओं को भी समझें। किताबों और फिल्मों के पात्रों के उदाहरण देकर उन्हें भावनाएं पहचानना और व्यक्त करना सिखाएं। बच्चा गुस्सा हो, तो खुद शांत रहें और गहरी सांस लेकर उसे भी ऐसा करना सिखाएं। अच्छे व्यवहार की सराहना करें। कल्पनाशील खेल भी बच्चों में आत्मनियंत्रण और भावनात्मक प्रबंधन की क्षमता विकसित करते हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 06, 2026, 02:00 IST
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