धनतेरस विशेष: रतलाम के महालक्ष्मी मंदिर में करोड़ों के नोटों और जेवरों से सजा दरबार, कब से होंगे दर्शन?

दीपावली पर देशभर में जहां मंदिरों को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है, वहीं मध्य प्रदेश के रतलाम में एक ऐसा मंदिर है, जहां माता लक्ष्मी का दरबार भक्तों के रुपयों और सोने-चांदी के जेवरों से सजता है। माणकचौक स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर में इस बार भी करोड़ों रुपये के नोटों और आभूषणों से आकर्षक सजावट की जा रही है। नोटों के फूल, गुलदस्ते और वंदनवार तैयार किए जा रहे हैं। धनतेरस पर सुबह पूजा के बाद श्रद्धालु इस अनूठे शृंगार के दर्शन कर सकेंगे। खास बात यह है कि भक्तों की ओर से सजावट के लिए जमा कराए गए रुपये और जेवर बाद में उन्हें वापस कर दिए जाते हैं। शरद पूर्णिमा से शुरू हुआ नोट जमा कराने का सिलसिला रतलाम के माणकचौक क्षेत्र में स्थित प्राचीन श्री महालक्ष्मी मंदिर में दीपावली पर रुपयों और जेवरों से सजावट की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस सजावट के लिए किसी एक संस्था की बजाय सैकड़ों श्रद्धालु अपनी ओर से नोटों की गड्डियां और आभूषण जमा कराते हैं। शरद पूर्णिमा से ही मंदिर में सजावट के लिए नोट जमा करने का सिलसिला शुरू हो गया था। अब तक दो से तीन हजार श्रद्धालु एक रुपये से लेकर 500 रुपये तक के नोटों की गड्डियां जमा करा चुके हैं। 5 नवंबर की रात तक भक्तों से रुपये स्वीकार किए जा रहे हैं। गुरुवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु नोटों की गड्डियां लेकर मंदिर पहुंचे। देश के कई राज्यों से पहुंच रहे श्रद्धालु मंदिर में केवल रतलाम और आसपास के क्षेत्रों के लोग ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के दूसरे जिलों और देश के विभिन्न राज्यों से भी श्रद्धालु सजावट के लिए रुपये लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें गुजरात, कर्नाटक, गोवा, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों के भक्त शामिल हैं। कुछ श्रद्धालुओं ने विदेशी मुद्रा भी जमा कराई है। मंदिर में नोटों से गमले, फूल, गुलदस्ते और वंदनवार तैयार किए जा रहे हैं। सजावट का काम देर रात तक जारी रहा। मंदिर के पुजारी अश्विन पुजारी के अनुसार, इस वर्ष भी मंदिर को नोटों और सोने-चांदी के आभूषणों से सजाया जा रहा है। पहले आम श्रद्धालुओं से भी जेवर लिए जाते थे, लेकिन अब कुछ चुनिंदा दुकानदारों से ही आभूषण लिए जाते हैं। पांच दिन तक सजेगा दरबार, बाद में लौटेंगे रुपये और जेवर धनतेरस पर 6 नवंबर 2026 को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में मां महालक्ष्मी की पूजा की जाएगी। इसके बाद श्रद्धालु नोटों और जेवरों से सजे मंदिर में दर्शन कर सकेंगे। मंदिर पांच दिनों तक इसी तरह सजा रहेगा। भाईदूज के बाद श्रद्धालुओं को उनके जमा कराए गए रुपये और जेवर लौटाने की प्रक्रिया शुरू होगी। मंदिर में जमा राशि और आभूषणों का पूरा हिसाब रखा जाता है। मान्यता है कि मंदिर में पूजा के बाद वापस मिली नोटों की गड्डी को घर की तिजोरी में रखने से बरकत और सुख-समृद्धि बनी रहती है। सुरक्षा के लिए 24 कैमरों से निगरानी नोटों और जेवरों की बड़ी मात्रा को देखते हुए मंदिर में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। चार सुरक्षा गार्ड आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी कर रहे हैं। इसके अलावा पुलिस अधिकारी भी समय-समय पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं। मंदिर परिसर में 24 घंटे निगरानी के लिए 24 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। पास में ही माणकचौक पुलिस थाना भी स्थित है। ऑनलाइन टोकन से जमा हो रही श्रद्धालुओं की राशि श्रद्धालुओं को लंबी कतारों से बचाने के लिए इस बार ऑनलाइन पंजीयन की व्यवस्था की गई है। भक्तों को ऑनलाइन फॉर्म में अपना नाम, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी, शहर, राज्य, पिन कोड और पता दर्ज करना होता है। रजिस्ट्रेशन के बाद मिलने वाला नंबर मंदिर में दिखाने पर ऑपरेटर श्रद्धालु की जानकारी दर्ज कर राशि जमा करता है। इसके बाद मोबाइल पर ओटीपी आता है। ओटीपी दर्ज होने पर टोकन जनरेट हो जाता है। टोकन की दो प्रतियां बनाई जाती हैं। एक श्रद्धालु के पास और दूसरी मंदिर समिति के पास रहती है। भाईदूज के बाद रुपये वापस लेते समय श्रद्धालु को अपना टोकन जमा कराना होगा। इसी के आधार पर जमा राशि लौटाई जाएगी। धनतेरस से मिलेगी कुबेर पोटली मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को धनतेरस से कुबेर पोटली भी वितरित की जाएगी। बुधवार को विधि-विधान से पोटली का पूजन किया गया। धनतेरस की सुबह पांच बजे आरती के बाद इसका वितरण शुरू होगा, जो भाईदूज तक जारी रहेगा। लाल कपड़े में दी जाने वाली इस पोटली में कमलगट्टा, कौड़ी, चावल, सुपारी, पिस्ता और गोमती चक्र रखे जाते हैं। मान्यता है कि इन सामग्रियों को मां लक्ष्मी को अर्पित करने से व्यापार में उन्नति और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। 17 साल से मंदिर आ रहीं श्रद्धालु, पहली बार जमा कराए रुपये शिक्षिका प्रियंका जोशी ने बताया कि वह पिछले 17 वर्षों से मंदिर में दर्शन करने आ रही हैं। उनकी मान्यता है कि मां लक्ष्मी के दरबार में नोटों की गड्डी जमा कराने और पूजा के बाद उसे घर की तिजोरी में रखने से बरकत बनी रहती है। व्यवसायी लोकेश मित्तल ने बताया कि वह अपने नोटों की गड्डी जमा कराने आए हैं, ताकि दीपावली पर मंदिर में उनके रुपयों की भी पूजा हो सके। वहीं, आदर्श द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने मंदिर की इस परंपरा के बारे में काफी सुना था। इस बार पहली बार सजावट के लिए नोटों की गड्डी जमा कराई है। उन्होंने ऑनलाइन पंजीयन व्यवस्था को भी सुविधाजनक बताया।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 05, 2026, 19:59 IST
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