Nithari Kand: कोली की कोर्ट से गुहार- सजा कम करें, अदालत ने कहा- तुम्हारा गुनाह क्षमा योग्य नहीं 

नोएडा के 2006 के बहुचर्चित निठारी कांड में बृहस्पतिवार को सीबीआई कोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या के दोषी सुरेंद्र कोली को सजा ए मौत सुनाई। इसी केस में देह व्यापार के दोषी मोनिंदर सिंह पंढेर को सात साल कारावास की सजा सुनाई गई है। इस फैसले के साथ ही 2007 में शुरु हुई निठारी के 16 केस की सुनवाई 15 साल और एक महीने में पूरी हो गई। सीबीआई के जज राकेश कुमार त्रिपाठी ने 17 मई को दोनों को दोषी करार दे दिया था। यह केस ऊधम सिंह नगर की निवासी 21 साल की युवती के साथ दुष्कर्म और हत्या का था। वह 2006 में निठारी की कोठी नंबर डी-5 में पंढेर से नौकरी मांगने के लिए आई थी। इसके बाद घर नहीं लौटी। पुलिस ने कोठी की तलाशी ली तो वहां 19 नर कंकाल निकले। पुलिस के बाद जांच करने वाली सीबीआई ने कुल 19 केस दर्ज किए। इनमें तीन में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी। 16 केस कोर्ट में चले। युवती से दुष्कर्म कर हत्या का केस 16 वें नंबर पर था। इसी की जांच में खुलासा हुआ था कि पंढेर देह व्यापार भी करता था। अदालत ने कोली पर 40 हजार और मोनिंदर पंढेर पर चार हजार का अर्थदंड लगाया है। 16 केस में से कोली को 13 केस में फांसी की सजा दी गई जबकि तीन में बरी हो गया। पंढेर पर दर्ज सात केस में दो में मृत्युदंड मिला जबकि चार में बरी हो गया और देह व्यापार के एक केस में सात साल कारावास की सजा सुनाई गई। टुकड़े-टुकड़े कर नाले में फेंक दिया था शव सीबीआई कोर्ट में अभियोजन पक्ष के सीबीआई के लोक अभियोजक दर्शन लाल ने अदालत को बताया था कि काम की तलाश में गई युवती के साथ सुरेंद्र कोली ने दुष्कर्म किया। बाद में गले में उसी की चुन्नी बांध कर उसकी हत्या कर दी गई। शव को बाथरूम में ले जाकर कोली ने शरीर से सर को काटकर अलग कर दिया। शरीर के कई टुकड़े कर अलग-अलग पॉलिथीन में बांधकर रख दिया। इसके बाद बची हुई हड्डियों को कोठी के पीछे नाले में फेंक दिया था। कोर्ट ने कहा, तुम्हारा गुनाह क्षमा योग्य नहीं डासना जेल से सीबीआई कोर्ट पहुंचे कोली और पंढेर तनाव में थे। कोली ने अर्जी देकर कहा कि उसकी सजा कम की जाए। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा, तुम्हारा गुनाह क्षमा करने योग्य नहीं है। एक ही बार जारी हुआ डेथ वारंट, फांसी नहीं हुई कोली के खिलाफ सिर्फ एक बार डेथ वारंट जारी हुआ है। इस केस में 2009 में सजा ए मौत सुनाई गई थी। 2014 में राष्ट्रपति ने दया याचिका खारिज कर दी थी। चार सितंबर 2014 को उसे गाजियाबाद की डासना जेल से मेरठ जेल भेज दिया गया। फांसी की तैयारी हो गई थी, लेकिन देरी हो जाने के कारण यह टल गई। फांसी रोक दिए जाने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश सुबह चार बजे जेल पहुंचा था। अन्य मामलों में कोली और पंढेर ने फांसी की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रखी है। ये विचाराधीन हैं। गुनाह और सजा कोली कुल दर्ज केस - 16 सजा ए मौत - 13 बरी - 03 मोनिंदर सिंह पंढेर कुल दर्ज केस - 07 सजा ए मौत - 02 बरी - 04 एक केस में सात साल कारावास। सजा का हिसाब-किताब 13 फरवरी 2009 : कोली और पंढेर को सजा-ए-मौत। हाईकोर्ट से पंढेर बरी 12 मई 2010 : कोली को सजा-ए-मौत 28 अक्टूबर 2010 : कोली को सजा-ए-मौत 22 दिसंबर 2010 : कोली को सजा-ए-मौत 24 दिसंबर 12 : कोली को सजा-ए-मौत 7 अक्तूबर 2016 : कोली को सजा-ए-मौत 16 दिसंबर 2016 : कोली को सजा-ए-मौत 24 जुलाई 2017 : कोली को सजा-ए-मौत, पंढेर बरी 8 दिसंबर 2017 : कोली एवं मोनिंदर पंढेर को सजा-ए-मौत 2 मार्च 2019 : कोली को सजा-ए-मौत, पंढेर बरी 6 अप्रैल 2019 : कोली को सजा-ए-मौत, पंढेर बरी 16 जनवरी 2021: कोली को सजा ए मौत 26 मार्च 2021 : कोली बरी सात जनवरी 2022 : कोली बरी 22 जनवरी 2022 : कोली बरी 19 मई 2022 : कोली को सजा-ए-मौत, पंढेर को सात साल कारावास।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 20, 2022, 06:52 IST
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