मध्य प्रदेश में डेंगू नियंत्रण का नया मॉडल: एआई तकनीक से पहले मिलेगी खतरे की चेतावनी; 38 लाख घरों का सर्वे
मानसून की दस्तक के साथ प्रदेश में डेंगू और अन्य वेक्टर जनित बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। इस बार विभाग ने बीमारी नियंत्रण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा लिया है। राज्य कार्यक्रम अधिकारी, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, डॉ. हिमांशु जायसवार ने बताया कि मध्य प्रदेश में पहली बार एआई आधारित प्रेडिक्शन सिस्टम तैयार किया गया है, जो संभावित डेंगू प्रभावित क्षेत्रों का पूर्वानुमान लगाएगा। डॉ. जायसवार के अनुसार, इस सिस्टम में पिछले वर्षों के डेंगू मामलों का डेटा, मौसम विभाग से प्राप्त वर्षा और तापमान संबंधी जानकारी, आबादी, शहरी-ग्रामीण परिस्थितियों सहित कई प्रकार के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। एआई की मदद से यह अनुमान लगाया जा सकेगा कि अगले एक महीने में किन क्षेत्रों में डेंगू के मामले बढ़ने की आशंका है। पहले मिल जाएगी चेतावनी उन्होंने बताया कि यदि किसी क्षेत्र में डेंगू के मामलों में वृद्धि की संभावना का पूर्वानुमान मिल जाता है, तो वहां पहले से लार्वा सर्वे, फॉगिंग, कीटनाशकों की उपलब्धता और जनजागरूकता जैसी गतिविधियां तेज की जा सकेंगी। इससे बीमारी फैलने से पहले ही नियंत्रण के प्रयास शुरू हो जाएंगे। प्रदेश में पहली बार होगा ऐसा प्रयोग डॉ. जायसवार ने कहा कि गुजरात और दिल्ली समेत कुछ राज्यों में अलग-अलग स्तर पर ऐसे प्रयोग किए गए हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में पहली बार इस तरह का एआई आधारित प्रेडिक्शन सिस्टम लागू किया जा रहा है। यह विभाग का एक नवाचार है, जिसे भारत सरकार भी प्रोत्साहित कर रही है। एक वर्ष बाद इसके परिणामों का विश्लेषण कर इसकी सटीकता और प्रभाव का मूल्यांकन किया जाएगा। 38.70 लाख घरों का सर्वे डेंगू नियंत्रण के लिए प्रदेशभर में व्यापक अभियान चलाया गया है। वर्ष 2026 में अब तक 38.70 लाख से अधिक घरों में लार्वा सर्वे किया गया। इनमें 20,238 घरों में मच्छरों का लार्वा मिला, जिसे मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा एंटी-लार्वल केमिकल का छिड़काव, गम्बुसिया मछलियों का संचयन और अन्य नियंत्रण गतिविधियां लगातार जारी हैं। 18 हजार जांच, 303 मरीज प्रदेश में अब तक 18 हजार से अधिक डेंगू जांचें की जा चुकी हैं, जिनमें 303 मरीज संक्रमित पाए गए हैं। पिछले वर्ष इसी अवधि में 344 मामले सामने आए थे। इस प्रकार इस बार डेंगू के मामलों में लगभग 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। डॉ. जायसवार के अनुसार, फिलहाल प्रदेश में डेंगू की स्थिति सामान्य है और कहीं भी एक साथ बड़ी संख्या में मरीज सामने नहीं आए हैं। 64 लैब में निशुल्क जांच सुविधा डेंगू की समय पर पहचान और उपचार के लिए प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों तथा चिन्हित सिविल अस्पतालों सहित कुल 64 सेंटीनल लैब में निशुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। पढ़ें:डिलीट चैट्स और वॉट्सऐप बैकअप खंगाल रही सीबीआई, मोबाइल डेटा पर टिकी जांच की अहम कड़ी इंदौर में ड्रोन के बाद अब एआई तकनीक स्वास्थ्य विभाग डेंगू नियंत्रण में नई तकनीकों का उपयोग बढ़ा रहा है। इंदौर जिले में ड्रोन के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जा रही है, जहां सामान्य रूप से पहुंचना कठिन है और जहां मच्छरों के पनपने की संभावना अधिक रहती है। अब इसी दिशा में एआई आधारित पूर्वानुमान प्रणाली को भी जोड़ा जा रहा है। 28 जिलों में 1,500 वालंटियर संभाल रहे मोर्चा एम्बेड परियोजना के तहत 28 जिलों में लगभग 1,500 वालंटियर जनजागरूकता, लार्वा सर्वे, केस फॉलो-अप और अन्य गतिविधियों में सक्रिय हैं। इसके अलावा स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय निकायों के सहयोग से रैलियां, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर प्रतियोगिताएं और जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। डेंगू से बचाव के 5 उपाय घर और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करें। पूरी बांह के कपड़े पहनें। मच्छरदानी और मच्छर रोधी उत्पादों का उपयोग करें। बुखार आने पर तुरंत जांच कराएं। वर्ष टोटल टेस्ट पॉजिटिव केस 2019 99,68,281 14,147 2020 90,56,958 6,760 2021 98,64,546 3,181 2022 1,10,37,771 3,826 2023 1,15,30,451 3,794 2024 1,18,74,645 3,252 2025 1,13,56,234 2,083 2026* 3,060 303 *2026 के आंकड़े अब तक के हैं।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 13, 2026, 18:43 IST
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