नेपाल: तमाम एतराज को दरकिनार कर स्थानीय चुनाव टालने का मन बनाया देउबा ने

नेपाल की शेर बहादुर देउबा सरकार ने स्थानीय चुनावों को आठ महीने से एक साल तक के लिए टालने का मन बना लिया है। बताया जाता है कि इस बारे में सत्ताधारी गठबंधन में सहमति बन गई है। लेकिन ऐसा करने के लिए संबंधित कानून संशोधन करना होगा। सरकार को उसमें दिक्कत पेश आ सकती है। बताया जाता है कि संवैधानिक विशेषज्ञों ने नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को यह रास्ता सुझाया है। इसके तहत स्थानीय स्तर निर्वाचन अधिनियम में संशोधन करने का प्रस्ताव है। सत्ताधारी गठबंधन के सूत्रों का दावा है कि यह संशोधन होने से इस कानून और संवैधानिक प्रावधानों के बीच मौजूद विसंगतियां दूर हो जाएंगी। केपी शर्मा ओली कर रहे हैं विरोध इस बात की भनक लगते ही विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) ने आक्रामक तेवर अपना लिए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली ये पार्टी स्थानीय चुनावों को टालने का आरंभ से ही विरोध कर रही है। उसका आरोप है कि सत्ताधारी गठबंधन हार से बचने के लिए चुनाव टालने की साजिश रच रहा है। नेपाल के निर्वाचन आयोग ने स्थानीय चुनावों को अगले अप्रैल-मई में कराने की योजना घोषित की थी। यूएमएल पार्टी का कहना है कि इन चुनावों को टालने का मतलब कानून के राज पर प्रहार है। बताया जाता है कि अनेक संविधान विशेषज्ञ भी चुनाव टालने को उचित नहीं मानते। यहां तक कि सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस का एक धड़ा भी चुनाव टालने के खिलाफ है। लेकिन ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री देउबा ने अपने गठबंधन सहयोगियों- नेपाली की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूनिफाइड सोशलिस्ट) की राय तो ज्यादा तरजीह दी है। पुष्प कमल दहल और माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाली ये पार्टियां अप्रैल-मई में चुनाव का विरोध कर रही हैं। नेपाली कांग्रेस के प्रमुख नेता शेखर कोइराला ने सोमवार को इस मुद्दे पर पार्टी के नेताओं के साथ एक वर्चुअल बैठक की। ये नेता इस बैठक में इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि प्रधानमंत्री देउबा एकतरफा ढंग से फैसले ले रहे हैं। पार्टी के इस खेमे की राय है कि चुनावों को टालना नेपाली कांग्रेस के लिए आत्मघाती कदम होगा। देउबा को पार्टी में टूट को डर नेपाली अखबारों में छपी खबर के मुताबिक देउबा इस समय गहरे राजनीतिक दबाव में हैं। उन्हें भय है कि अपने गठबंधन में अगर उन्होंने किसी को नाराज किया, तो वह दल या पार्टी का खेमा यूएमएल के साथ हाथ मिला सकता है। वैसी हालत में चुनाव में सत्ताधारी गठबंधन की चुनौतियां और बढ़ जाएंगी। शेखर कोइराला खेमे के एक नेता ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- स्थानीय चुनावों को आठ से 12 महीनों तक के लिए टाल देने की बात हो रही है। लेकिन ऐसा करना नेपाली कांग्रेस के हित में नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में इस प्रस्ताव पर सबको शामिल करते हुए खुली चर्चा नहीं हुई है। उधर पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त सूर्य प्रसाद श्रेष्ठ ने कहा है कि चुनावों को टालने का कोई कारण समझ में नहीं आता। उन्होंने कहा- चुनावों को टालने से क्या मकसद हासिल होगा, यह साफ नहीं है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 25, 2022, 19:32 IST
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