कुशाग्र हत्याकांड: कोर्ट ने कहा- रिश्तों में अविश्वास पैदा करने वाला गुनाह…नहीं दिखा सकते दया, पढ़ें जरूरी तथ्य

कानपुर में अभियुक्तों का गुनाह समाज में अराजकता और रिश्तों में अविश्वास पैदा करने वाला है। गुनाह ऐसा नहीं है कि दया दिखाई जाए। यह टिप्पणी कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए की। कोर्ट ने कहा कि मृतक 16 साल का अबोध बालक था, जिसे रचिता पहले ट्यूशन पढ़ाती थी। ट्यूशन पढ़ाने के दौरान कुशाग्र की मां सोनिया से रचिता के घरेलू संबंध हो गए थे। सोनिया रचिता को बच्चे की तरह प्यार करती थी। रचिता ने प्रभात को अपना पुरुष मित्र बताकर दोनों से मिलवाया और बाद में संबंधों का फायदा उठाकर 30 लाख रुपये की फिरौती के लिए अपहरण करके हत्या कर दी। यह समाज में अध्यापक और विद्यार्थी के संबंधों को कलंकित करने वाला है। एक ऐसा बालक जिसकी अभियुक्तों से कोई दुश्मनी नहीं थी, उसने उकसावे का कोई कृत्य नहीं किया था। वह पूरी तरह निर्दोष व असहाय था और अभियुक्तों के रिश्तों और सामाजिक मानदंडों के भरोसे पर निर्भर था।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 23, 2026, 04:00 IST
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