Monsoon: कम बारिश की आशंका, 10 मंत्रालयों को साथ काम करने का निर्देश; PM मोदी बोले- आपातकालीन योजना रखें तैयार
देश में कम बारिश की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के दौरान स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करने और समय रहते पुख्ता तैयारियां करने के निर्देश दिए। सूत्रों के अनुसार, बैठक में पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि, पानी की उपलब्धता और बिजली आपूर्ति जैसे जरूरी क्षेत्रों पर कम बारिश का बुरा असर न पड़े, इसके लिए पहले से ही आपातकालीन योजना तैयार रखी जाए। सरकार के 10 प्रमुख मंत्रालय इस पूरी स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखेंगे। इनमें मुख्य रूप से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि ये सभी 10 मंत्रालय मिलकर एक साझा रणनीति बनाएंगे। उन्हें जमीनी स्तर पर स्थिति का लगातार आकलन करने, रियल-टाइम में डाटा साझा करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाने को कहा गया है। पीएम साफ किया कि तैयारियों में किसी भी स्तर पर ढिलाई या विभागों के बीच तालमेल की कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।बता दें कि मौसम विभाग ने जुलाई महीने में देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका जताई है। केंद्र सरकार ने राशन की दुकानों के जरिये 80 करोड़ से अधिक लोगों को वितरित किए जाने वाले चावल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का फैसला किया। इसके लिए कुल आपूर्ति में टूटे चावल की मात्रा को कम किया जाएगा। केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि केंद्रीय कैबिनेट ने राशन की दुकानों से आपूर्ति किये जाने वाले चावल में टूटे हुए चावल की तय सीमा को कम करने का फैसला किया है। कच्चे चावल में टूटे चावलों की सीमा 25% से घटाकर 10% कर दी गई है। आधे उबले चावल (पारबॉयल्ड) में यह सीमा 16 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है।जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट ने देश की अनाज सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए यह ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। करीब 30 साल बाद पहली बार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत वितरित किए जाने वाले चावल के गुणवत्ता मानकों में सुधार किया गया है। इससे 80 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को सम्मान के साथ बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पीएमजीकेएवाई के तहत हर पात्र परिवार को पहले की तरह ही तय मात्रा में अनाज मिलता रहेगा लेकिन अब उसकी गुणवत्ता पहले से काफी बेहतर होगी। ये भी पढ़ें:चिंताजनक:टूटे रिकॉर्ड, जून में उच्चतम स्तर पर पहुंचा महासागरों की सतह का तापमान, वैज्ञानिकों ने दी ये चेतावनी उन्होंने कहा कि यह बड़ा सुधार सरकार की बेहतर गुणवत्ता वाला अनाज देने, हर दाने का सही उपयोग सुनिश्चित करने, क्यूआर कोड के जरिये पारदर्शिता बढ़ाने और लागत को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने की प्रतिबद्धता को दिखाता है। सरकार किसानों से खरीदे गए अनाज के हर दाने का सही इस्तेमाल कर रही है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एनएफएसए) के तहत सरकार हर पात्र व्यक्ति को हर महीने पांच किलोग्राम अनाज (चावल और गेहूं) मुफ्त देती है। वहीं, अंत्योदय अन्न योजना के तहत आने वाले परिवारों को हर महीने 35 किलोग्राम अनाज दिया जाता है। अच्छी गुणवत्ता का चावल राशन की दुकानों के जरिये लाभार्थियों को दिया जाता है, वहीं उससे निकले टूटे हुए चावल का इस्तेमाल प्रोसेसिंग (जैसे इथेनॉल बनाने) और जानवरों के चारे के लिए किया जाता है। सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं और चावल खरीदती है। फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत अनाज की खरीद और वितरण के लिए नोडल एजेंसी है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jul 02, 2026, 04:15 IST
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