Pauri News: आधुनिकता के साथ भारतीय ज्ञान के संवर्द्धन को किया स्पष्ट

श्रीनगर l हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि के चौरास परिसर स्थित शैक्षणिक क्रियाकलाप केंद्र में एमएमटीटीसी के तत्वावधान में आयोजित छह दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम के दूसरे दिन भारतीय ज्ञान प्रणाली के दार्शनिक, शैक्षिक एवं व्यावहारिक आयामों पर केंद्रित सत्र संपन्न हुएए। पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा का एकीकरण विषय पर हुए दो अलग-अलग सत्रों में वक्ताओं ने आधुनिकता के साथ भारतीय ज्ञान के संवर्द्धन की अवधारणा को स्पष्ट किया।पतंजलि विवि के डॉ. प्रदीप कुमार साहू ने भारतीय दृष्टि और जीवन-दर्शन विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल उद्देश्य केवल सूचना या कौशल प्रदान करना नहीं, बल्कि मनुष्य के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करना है। उन्होंने पंचकोश सिद्धांत को मानव अस्तित्व की पांच परतों के रूप में व्याख्यायित किया और कहा कि शिक्षा का लक्ष्य इन सभी स्तरों के संतुलित विकास में निहित है। कुमाऊं विवि के डॉ. प्रकाश चंद्र जोशी ने भारतीय ज्ञान प्रणाली की शिक्षण-पद्धति पर कहा कि भारतीय परंपरा में शिक्षण केवल सूचना-प्रदान नहीं, बल्कि चरित्र-निर्माण, तर्क-विकास और आत्मबोध की प्रक्रिया है। उन्होंने शिक्षा की कला और तर्क के अभ्यास को भारतीय अध्यापन-पद्धति का आधार बताते हुए कहा कि यह प्रणाली जीवन-कौशल, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को समान रूप से महत्व देती है। इस अवसर पर यूजीसी पर्यवेक्षक प्रो. आरएल नारायण सिम्हा , कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अमरजीत परिहार, डॉ. पुनीत वालिया आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. कविता भट्ट ने किया।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 17, 2026, 17:08 IST
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