प्लास्टिक को मात : जलकुंभी से बनाए घरेलू उत्पाद, छात्राओं ने समस्या को रोजगार में बदला
झज्जर। जिले में चौवा ऊपर होने के चलते जगह-जगह जलकुंभी पानी के सोर्स को ब्लॉक कर रही हैं। खासतौर पर भिंडावास वन्यजीव अभ्यारण में काफी मात्रा में उगी जलकुंभी परेशानी का कारण बनी हुई हैं। अब इसका उपाय पांच छात्राओं और स्टॉफ सदस्यों ने मिलकर निकाला है।ढाकला गांव के राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं ने जलकुंभी के तने से घर में प्रयोग होने वाली 40 से 50 प्रकार के उत्पाद बनाए हैं। ये उत्पाद प्लास्टिक के मुकाबले काफी किफायती हैं और पर्यावरण प्रदूषण भी नहीं करते। ये उत्पाद प्लास्टिक का भी एक उत्तम विकल्प हैं।स्कूल स्टॉफ अर्थशास्त्र प्रवक्ता विजय कुमार और वाणिज्य प्रवक्ता योगिता सिंगला के नेतृत्व में 11वीं कक्षा की छात्राओं प्रियांशी, महक, तमन्ना, मनीषा और स्नेहा ने भिंडावास झील में उगी जलकुंभी को साफ कर ड्राई किया।उन्होंने सूखे रेशे का प्रयोग कर घर में प्रयोग होने वाली अलग-अलग डिजाइन की वस्तुओं पेन स्टैंड, सामान रखने की टोकारियां, खिलौने, थैले, पोट, मेट, रोटी रखने के डिब्बे सहित अलग-अलग प्रकार के 40 से 50 उत्पाद बनाए हैं। इसे टायकून्स नाम दिया और विषय ''एक जलकुंभी समस्या से रोजगार की ओर'' रखा।राज्यस्तर पर मिली प्रशंसा, एक लाख की मिलेगी राशिछात्राओं ने जिलास्तरीय कुशल बिजनेस चैलेंज 2.0 में भाग लिया था जहां उनको प्रथम स्थान मिला। इसके बाद राज्यस्तर पर भी भाग लेकर प्रशंसा मिली और एक लाख रुपये की राशि देने की घोषणा शिक्षा मंत्री ने की थी। अब हाल ही में शिक्षा विभाग इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए प्लेटफार्म देगा।महिलाओं के लिए रोजगार का एक अच्छा साधनस्कूल के प्राचार्य वेद प्रकाश, शिक्षक विजय कुमार, योगिता सिंगला ने बताया कि इन पर लगातार प्रयोग किया जा रहा हैं। इन उत्पादों को मजबूती देने के लिए कपास और पटसन का प्रयोग किया जाएगा ताकि और मजबूती हो सके। इसके अलावा यह उत्पाद महिलाओं के लिए रोजगार का एक अच्छा साधन बन सकते हैं क्योंकि कच्चे मेटिरियल के रूप में जलकुंभी फ्री में उपलब्ध हैं और केवल उसे ड्राई और साफ करने में लिए लेबर की जरूरत पड़ेगी।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 16, 2026, 03:00 IST
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