Narmadapuram: किन्नर सम्मेलन में सात किन्नरों की घर वापसी, वैदिक रीति से बने महामंडलेश्वर, दावों पर उठे सवाल

नर्मदापुरम के इटारसी में आज आयोजित अखिल भारतीय किन्नर सनातन सम्मेलन ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी। त्रिशालानंद गार्डन में हुए इस भव्य आयोजन में देशभर से करीब 500 किन्नरों की मौजूदगी रही, जहां धार्मिक अनुष्ठानों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सात किन्नरों की घर वापसी कराई गई। कार्यक्रम में दूध, घी और शहद से शुद्धिकरण अभिषेक कर उन्हें सनातन धर्म में पुनः शामिल किए जाने का दावा किया गया। इस आयोजन का नेतृत्व जगत गुरु काजल ठाकुर किन्नर ने किया। उनके सान्निध्य में मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों के सात किन्नरों को महामंडलेश्वर की उपाधि भी प्रदान की गई। इनमें नर्मदापुरम की पांचाली गुरु, पिपरिया की शांति, मुंगावली की डॉली नायक, इटावा की बेला नायक और तम्मना नायक तथा परेला की अंजली नायक शामिल हैं। आयोजकों के अनुसार यह सभी पहले दूसरे धर्म से जुड़े थे और अब उन्होंने सनातन परंपरा में वापसी की है। कार्यक्रम के दौरान जगत गुरु काजल ठाकुर ने दावा किया कि भटके हुए किन्नरों को फिर से सनातन धर्म से जोड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किन्नरों का उल्लेख सनातन ग्रंथों में मिलता है जबकि अन्य धर्मग्रंथों में उनका स्पष्ट वर्णन नहीं है। उनके अनुसार यह पहल धार्मिक पुनर्जागरण और सांस्कृतिक वापसी का हिस्सा है। ये भी पढ़ें:शहडोल के जैतपुर कांड में नया मोड़:तीन युवकों की मौत मामले में माइकल गिरफ्तार, ये सवाल अब भी बरकरार वहीं पांचाली गुरु किन्नर ने भावुक बयान देते हुए कहा कि उन्हें पहले कथित तौर पर धमकी देकर धर्म परिवर्तन कराया गया था लेकिन अब वे अपनी मर्जी से सनातन धर्म में लौट आई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे ब्राह्मण परिवार से हैं और महामंडलेश्वर की उपाधि मिलने पर उन्हें अत्यंत खुशी है। इस पूरे आयोजन पर काजल ठाकुर ने भी कहा कि यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि किन्नर समाज को उसकी जड़ों से जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने इसे एक सामाजिक और आध्यात्मिक अभियान बताया। हालांकि इस आयोजन के बाद कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। धर्म परिवर्तन, दबाव के आरोप और घर वापसी के दावों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। जहां एक पक्ष इसे आस्था की वापसी और परंपरा से जुड़ाव बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसकी सत्यता और परिस्थितियों पर सवाल उठा रहा है। इटारसी का यह सम्मेलन अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक और वैचारिक बहस का मुद्दा बन गया है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 24, 2026, 17:18 IST
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