Deepfake Viral Video: यूट्यूबर ने चुटकी में खुद को बनाया टेलर स्विफ्ट और सीतारमण; फिर यूं खुली डीपफेक की पोल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए गए वीडियो में ईशान शर्मा कुछ ही सेकंड में अलग-अलग वैश्विक और भारतीय हस्तियों में बदलते नजर आते हैं। वीडियो में वे दर्शकों को चेतावनी देते हैं कि अब सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज असली हो, यह जरूरी नहीं। उनका संदेश साफ था कि चेहरा, उम्र, जेंडर और आवाज सब कुछ एआई से बदला जा सकता है, और देखने वाला पहचान भी नहीं पाएगा। क्यों बढ़ रही है डीपफेक को लेकर चिंता एआई डीपफेक तकनीक इतनी उन्नत हो चुकी है कि किसी व्यक्ति से ऐसी बातें कहलवाई जा सकती हैं जो उसने कभी नहीं कही, फर्जी वीडियो बनाकर गलत सूचना फैलाई जा सकती है और सार्वजनिक हस्तियों की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। 2023 में 11 देशों में राजनीतिक विमर्श पर डीपफेक का असर दर्ज किया गया था। टेक एक्सपर्ट्स मानते हैं कि तकनीकी समझ की कमी वाले देशों में इसका खतरा ज्यादा है। ये भी पढ़े:शिकायत का झंझट खत्म:अब फ्रॉड कॉल पर होगी AI की पैनी नजर, TRAI का नया सिस्टम करेगा स्पैम की छुट्टी जागरूकता या सख्त नियंत्रण वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिसमें कुछ यूजर्स का कहना है कि सरकार को सभी भाषाओं में एआई जागरूकता अभियान चलाने चाहिए ताकि लोग फर्जी वीडियो पहचान सकें। दूसरे पक्ष का मानना है कि एआई पर ज्यादा सरकारी नियंत्रण व्यावहारिक नहीं है। उनका सुझाव है कि एआई से बने कंटेंट पर डिस्क्लेमर अनिवार्य किया जा सकता है। we are soo cooked!stay aware and let everyone know. pic.twitter.com/COpNAzt4mzmdash; Ishan Sharma (@Ishansharma7390) February 10, 2026 डीपफेक के बड़े खतरे 1. लोकतंत्र पर असर डीपफेक तकनीक चुनावी माहौल में बेहद खतरनाक हो सकती है। मान लीजिए किसी नेता का फर्जी वीडियो वायरल कर दिया जाए, जिसमें वह भड़काऊ बयान देता दिखे तो इससे मतदाताओं की राय प्रभावित हो सकती है। सामाजिक तनाव बढ़ सकता है, चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं और मीडिया व जनता के बीच विश्वास घट सकता है। 2023 में कई देशों में राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करने के लिए एआई-जनरेटेड कंटेंट का उपयोग हुआ। समस्या सिर्फ फर्जी वीडियो नहीं है, बल्कि समस्या विश्वास का टूटना है। जब लोग हर चीज को फर्जी समझने लगते हैं, तो असली जानकारी भी संदिग्ध लगने लगती है। 2. व्यक्तिगत नुकसान डीपफेक किसी आम व्यक्ति या सेलिब्रिटी को ऐसी स्थिति में दिखा सकता है जो उसने कभी नहीं की। खास तौर पर बिना अनुमति आपत्तिजनक कंटेंट में चेहरा जोड़ देना, फर्जी ऑडियो से झूठे बयान फैलाना और किसी की पेशेवर छवि खराब करना है। इससे मानसिक तनाव, सामाजिक अपमान और कानूनी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। महिलाएं और सार्वजनिक हस्तियां इस खतरे से अधिक प्रभावित होती हैं। 3. साइबर सुरक्षा खतरे डीपफेक सिर्फ वीडियो तक सीमित नहीं है। अब एआई आवाज भी हूबहू कॉपी कर सकता है। सीईओ की नकली आवाज बनाकर, कंपनी से पैसे ट्रांसफर कराना, बैंक या सरकारी अधिकारी बनकर ठगी करना और संस्थानों के खिलाफ फर्जी बयान जारी करना, ये सभी चीजें आसानी से हो सकती है। ऐसे मामलों में आर्थिक नुकसान और संस्थागत अस्थिरता दोनों हो सकते हैं। यही वजह है कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ अब AI-आधारित डिटेक्शन सिस्टम विकसित कर रहे हैं। ये भी पढ़े:YouTube Music लाया नया AI फीचर:अब बोलकर सकेंड्स में बनाएं मनचाही प्लेलिस्ट, Spotify को देगा टक्कर क्या डीपफेक का सकारात्मक इस्तेमाल संभव है हां, अगर जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ उपयोग हो। जैसे इससे महंगे वीएफएक्स सीन कम लागत में तैयार किए जा सकते हैं। इसके अलावा ऐतिहासिक पात्रों को जीवंत दिखाने और उम्र बदलने या डिजिटल रिक्रिएशन जैसे रचनात्मक चीजों में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा FORGE जैसे सिस्टम डीपफेक तकनीक का उपयोग सुरक्षा के लिए करते हैं। इसकी मदद से ये हमलावरों को भ्रमित करना, संवेदनशील डेटा को सुरक्षित रखना और फर्जी डिजिटल वातावरण बनाकर घुसपैठियों को रोकने का काम कर सकते हैं। ये एआई बनाम एआई मॉडल है, जहां सुरक्षा भी एआई से मजबूत हो सकती है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: Feb 12, 2026, 00:55 IST
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