WHO on Monkeypox: डब्ल्यूएचओ ने कहा- मंकीपॉक्स को वर्तमान में वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने की जरूरत नहीं

मंकीपॉक्स का प्रकोप विश्व में तेजी से बढ़ता जा रहा है। अब तक दुनिया के 42 देशों में यह खतरनाक वायरस फैल चुका है। अभी तक इसके 3,417 मामले सामने आ चुके हैं। तेजी से फैल रहे मंकीपॉक्स संक्रमण को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बैठक करने के बाद शनिवार को कहा कि मंकीपॉक्स वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय चिंता नहीं है, इसलिए इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित नहीं किया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ की ओर से जारीप्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि "डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक बहुदेशीय मंकीपॉक्स के प्रकोप के बारे में अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिनियम (आईएचआर) आपातकालीन समिति द्वारा दी गई सलाह से सहमत हैं और वर्तमान मेंयह निर्धारित नहीं करता है कि घटना अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (पीएचईआईसी) का गठन करती है।" बहुदेशीय मंकीपॉक्स के प्रकोप के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिनियम (2005) की आपातकालीन समिति की बैठक के बाद यह बयानसामने आया है।हालांकि, डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयससने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की। ट्विटर परटेड्रोस ने लिखा, "मंकीपॉक्स वायरस के आगे प्रसार को रोकने के लिए तत्काल समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है।समिति की सिफारिशों की पूरी सूची सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों का उपयोग करनेऔर यह सुनिश्चित करने के लिएनिष्पक्ष रूप से साझा किए गए हैं ताकी यह पता चल सके किस्वास्थ्य उपकरण संक्रमित आबादी के लिए उपलब्ध हैं।" डब्ल्यूएचओ के महानिदेशकने कहा कि वह मंकीपॉक्स के प्रसार से बहुत चिंतित हैं। इस वायरस को मई की शुरुआत से अब तक 3000 से अधिक मामलों के साथ पांच डब्ल्यूएचओ क्षेत्रों में 50 से अधिक देशों में पहचाना गया है।आपातकालीन समिति ने वर्तमान में प्रकोप के पैमाने और गति के बारे में गंभीर चिंताओं को साझा किया है। साथ ही कई अज्ञात औरवर्तमान डाटा के बीच के अंतरको नोट किया और एक आम सहमति रिपोर्ट तैयार की जो समिति के बीच अलग-अलग विचारों को दर्शाती है। कुल मिलाकर, रिपोर्ट मेंउन्होंने डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक को सलाह दी है कि इस समय यह घटना अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल नहीं है, जो कि डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी किए जाने वाले अलर्ट का उच्चतम स्तर है, लेकिन समिति ने यह स्वीकार किया कि बैठक का आयोजन मंकीपॉक्स के अंतर्राष्ट्रीय प्रसार के बारे में बढ़ती चिंता को दर्शाता है। बता दें किडब्ल्यूएचओने गुरुवार को अपनी आपात समिति की बैठक बुलाई थीताकि यह विचार किया जा सके कि क्या मंकीपॉक्स के बढ़ते प्रकोप को वैश्विक आपातकाल घोषित किया जाना चाहिए। कुछ विशेषज्ञों का कहना थाकि पश्चिम में बीमारी फैलने के बाद ही डब्ल्यूएचओ ने कार्रवाई करने का मन बनाया है। मंकीपॉक्स को वैश्विक आपातकाल घोषित करने का मतलब होगा कि संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी इस प्रकोप को एक "असाधारण घटना" मानती है और इस बीमारी के और भी अधिक सीमाओं में फैलने का खतरा है। यह कोविड-19 महामारी और पोलियो उन्मूलन के लिए जारी प्रयासों की तरह ही मंकीपॉक्स को लेकर भी कार्रवाई करेगी। पिछले हफ्ते, डब्ल्यूएचओ के महानिदेशकने कहा था कि हाल में 40 से अधिक देशों, ज्यादातर यूरोप में सामने आई बीमारी मंकीपॉक्स "असामान्य और चिंताजनक" है। मंकीपॉक्स से मध्य और पश्चिम अफ्रीका में दशकों से लोग बीमार होते रहे हैं जहां बीमारी के एक स्वरूप से 10 प्रतिशत रोगियों की मौत हो जाती है। अफ्रीका से परे इस बीमारी से अब तक किसी की मौत की सूचना नहीं है। नाइजीरियाई विषाणु विज्ञानी ओयेवाले तोमोरी ने कहा, "अगर डब्ल्यूएचओ वास्तव में मंकीपॉक्स फैलने के बारे में चिंतित था, तो वह अपनी आपातकालीन समिति की बैठक वर्षों पहले तब बुला सकता था जब यह बीमारी 2017 में नाइजीरिया में फिर से शुरू हुई थी और किसी को नहीं पता कि हमारे यहां अचानक सैकड़ों मामले कैसे आ गए।" उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ ने अपने विशेषज्ञों को केवल तब बुलाया है जब बीमारी श्वेत लोगों के देशों में भी सामने आ गई है।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 26, 2022, 06:28 IST
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