Women Mental Health: महिलाओं पर किस तरह का मानसिक बोझ बढ़ रहा? अदृश्य दबाव पर इस अध्ययन में बड़ा खुलासा
दुनिया तेजी से बदल रही है, महिलाएं नौकरी, कारोबार और हर पेशे में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन घर और परिवार की जिम्मेदारियों का मानसिक बोझ अब भी सबसे ज्यादा उन्हीं के कंधों पर है। यही वजह है कि महिलाओं में मानसिक थकावट और भावनात्मक तनाव तेजी से बढ़ रहा है। मेलबर्न यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर लिया रूपैनर के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि महिलाओं पर केवल घर के काम का दबाव नहीं है, बल्कि परिवार, रिश्तों, बच्चों और भविष्य को लेकर लगातार चलने वाली मानसिक चिंता उन्हें भीतर से थका रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ऐसा दबाव है जो दिखाई नहीं देता, लेकिन महिलाओं की मानसिक सेहत पर गहरा असर डाल रहा है। आखिर महिलाओं पर किस तरह का मानसिक बोझ बढ़ रहा अध्ययन के मुताबिक अब पुरुष पहले के मुकाबले घर के कामों में ज्यादा मदद कर रहे हैं, लेकिन घर को व्यवस्थित रखने की मानसिक जिम्मेदारी अब भी महिलाओं के हिस्से में ही आती है। कौन-सा सामान खत्म हो रहा है, बच्चों की पढ़ाई कैसी चल रही है, परिवार में किसकी तबीयत खराब है, रिश्तेदारों से कब बात करनी है और भविष्य की क्या योजना बनानी है, ऐसी तमाम बातें महिलाओं के दिमाग में लगातार चलती रहती हैं। प्रोफेसर रूपैनर ने कहा कि घर का कोई काम खत्म हो सकता है, लेकिन मानसिक जिम्मेदारियां खत्म नहीं होतीं। यही लगातार चलने वाला मानसिक दबाव महिलाओं को भावनात्मक रूप से थका देता है। क्या अपराधबोध महिलाओं की परेशानी बढ़ा रहा अध्ययन में यह भी सामने आया कि महिलाएं खुद के लिए समय निकालने में भी अपराधबोध महसूस करती हैं। प्रोफेसर रूपैनर ने बताया कि कई महिलाएं अपनी जरूरतों से ज्यादा परिवार की जरूरतों को प्राथमिकता देती हैं। शोध के दौरान कुछ महिलाओं को आर्थिक सहायता दी गई, लेकिन अधिकांश महिलाएं वह पैसा खुद पर खर्च करने से हिचक रही थीं। वे उसे परिवार के लिए इस्तेमाल करना चाहती थीं। हालांकि जब महिलाओं ने खुद पर समय और संसाधन खर्च किए तो उनके मानसिक तनाव में कमी देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं को आत्म-देखभाल और जरूरत पड़ने पर बाहरी मदद लेने को लेकर अपराधबोध छोड़ना होगा। मानसिक दबाव मतलब लाइफ ऑर्गनाइजेशन घर और परिवार की योजना बनाना इमोशनल सपोर्ट सभी की भावनाओं का ध्यान रखना रिलेशनशिप हाइजीन रिश्तों को मजबूत बनाए रखना मैजिक मेकिंग त्योहार और अवसर खास बनाना ड्रीम बिल्डिंग परिवार के सपनों को पूरा करने की चिंता सेफ्टी परिवार की सुरक्षा की चिंता ये भी पढ़ें-Weather:नौतपा की आग में झुलसा उत्तर भारत, अब पश्चिमी विक्षोभ से राहत की आस; PM मोदी ने भी की ये अपील मानसिक दबाव किन-किन रूपों में सामने आता अध्ययन में महिलाओं के मानसिक बोझ को आठ हिस्सों में बांटा गया है। इसमें घर की योजना बनाना, परिवार की भावनात्मक देखभाल करना, रिश्तों को संभालना और त्योहारों या खास मौकों को यादगार बनाने की जिम्मेदारी शामिल है। इसके अलावा परिवार के सपनों को पूरा करने की चिंता, खुद को फिट रखने का दबाव और परिवार की सुरक्षा को लेकर लगातार सोच भी महिलाओं पर असर डालती है। सबसे बड़ा दबाव यह होता है कि महिलाएं हमेशा यह सोचती रहती हैं कि वे परिवार और समाज के लिए पर्याप्त कर पा रही हैं या नहीं। यही लगातार चलने वाली मानसिक प्रक्रिया उन्हें भावनात्मक रूप से थका देती है। क्या बराबरी से बदल सकती है स्थिति विशेषज्ञों का कहना है कि जब महिलाओं को शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और फैसले लेने का अधिकार मिलता है, तब घरों में जिम्मेदारियों का बंटवारा बेहतर होता है। इससे रिश्ते भी मजबूत होते हैं और महिलाओं का मानसिक तनाव कम होता है। अध्ययन में यह भी कहा गया कि परिवारों को अब घर के अदृश्य मानसिक श्रम को समझना होगा। केवल खाना बनाना या सफाई करना ही काम नहीं है, बल्कि परिवार की हर छोटी-बड़ी चिंता को लगातार संभालना भी बड़ा मानसिक श्रम है। अगर घरों में जिम्मेदारियां बराबर बांटी जाएं तो महिलाओं की मानसिक स्थिति बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली में महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारी बढ़ गई है। वे बाहर नौकरी भी कर रही हैं और घर की मानसिक जिम्मेदारियां भी निभा रही हैं। यही कारण है कि तनाव, चिंता और मानसिक थकावट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अध्ययन ने यह संकेत दिया है कि समाज को अब महिलाओं के इस अदृश्य मानसिक श्रम को गंभीरता से समझना होगा। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसका असर परिवार, रिश्तों और समाज की मानसिक सेहत पर भी पड़ सकता है।
- Source: www.amarujala.com
- Published: May 28, 2026, 02:16 IST
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