Almora News: जैखाल में जंगली जानवरों ने छीनी खेती, फल उत्पादन पर भी संकट
स्याल्दे (अल्मोड़ा)। कभी खेतों में लहलहाती फसलें और बच्चों की चहल-पहल से राैनक जैखाल ग्राम सभा आज उदास है। विकासखंड के इस दूरस्थ क्षेत्र में अब खाली होते घर, सूने खेत और बंद पड़े स्कूल ग्रामीण जीवन के संकट की गवाही दे रहे हैं। गांवों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक ने लोगों को अपने पुश्तैनी घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है।ग्रामीणों के अनुसार पलायन की सबसे बड़ी वजह खेती का चौपट होना है। करीब 400 हेक्टेयर भूमि में कभी गेहूं, धान, मडुवा, मक्का, सोयाबीन और सरसों की भरपूर पैदावार होती थी। खेती ही लोगों की आजीविका का मुख्य आधार थी लेकिन बंदर, जंगली सूअर और अन्य वन्यजीव लगातार फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। खेतों में रात-दिन की मेहनत के बाद भी किसानों को उपज नहीं मिल पा रही है।फल उत्पादन भी अब संकट में है। फुटीकुवा, कुलसीरा और रणपाथर जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में संतरा, माल्टा, नारंगी, नींबू, काफल और पहाड़ी ककड़ी का उत्पादन होता है लेकिन उचित बाजार और सरकारी समर्थन के अभाव में ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। ग्रामीण लंबे समय से इस क्षेत्र को फल पट्टी घोषित करने की मांग कर रहे हैं लेकिन अब तक यह मांग फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी है।करीब एक दशक पहले जैखाल ग्राम सभा में 260 से अधिक परिवारों की लगभग 1100 आबादी रहती थी, लेकिन अब 300 से ज्यादा लोग गांव छोड़ चुके हैं। ग्राम सभा के छह तोक जैखाल, कुलसीरा, पातल, रणपाथर, फुटीकुवा और गहतड़वा लगातार खाली होते जा रहे हैं। सबसे अधिक असर जैखाल तोक में देखने को मिला है। यहां पहले 120 परिवार रहते थे लेकिन अब केवल 85 परिवार ही बचे हैं।इसी तरह कुलसीरा से नौ, पातल से चार और रणपाथर से भी चार परिवार पलायन कर चुके हैं। करीब 20 परिवार ऐसे हैं जो वर्षों से गांव लौटे ही नहीं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ें, सड़कें बनें और स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत हों तो पलायन को काफी हद तक रोका जा सकता है।स्कूलों में घटती जा रही छात्र संख्यापलायन का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जिन स्कूलों में कभी बच्चों की आवाज गूंजती थी, वहां अब गिनती के छात्र बचे हैं। जैखाल के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पहले 110 बच्चे पढ़ते थे, लेकिन अब केवल 15 छात्र रह गए हैं। रणपाथर प्राथमिक विद्यालय में छात्र संख्या 35 से घटकर छह रह गई है, जबकि कुलसीरा विद्यालय में 50 से घटकर केवल 25 बच्चे पढ़ रहे हैं।सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं भी बड़ी चुनौतीग्रामीणों का कहना है कि सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली ने हालात और खराब कर दिए हैं। कुलसीरा और फुटीकुवा जैसे क्षेत्रों में आज भी सड़कें अधूरी हैं। बीमार पड़ने पर मरीजों को दो से तीन किलोमीटर तक डोली में उठाकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। आपात स्थिति में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।बोले लोगकरीब 20 वर्ष पहले गांव पूरी तरह आबाद था और अधिकांश लोग खेती पर निर्भर थे। रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश में परिवार गांव छोड़ते चले गए। पलायन ने गांव की आत्मा को जैसे खाली कर दिया है।- हरी सिंह रावत, ग्रामीण, जैखाल गांव के दो विद्यालयों में कभी करीब 80 बच्चे पढ़ते थे, लेकिन अब दोनों स्कूलों में मिलाकर पांच बच्चे भी मुश्किल से रह गए हैं।- सुरेन्द्र पोखरियाल, ग्रामीण, रणपाथर
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 01, 2026, 21:55 IST
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