विश्व जल दिवस आज: कब तक रहेंगे नर्मदा के भरोसे, इंदौर की प्यास बुझाने को नए स्रोतों का विकास जरूरी

भागीरथपुरा के दूषित जल हादसे में हुई मौतों ने देश भर का ध्यान इंदौर की ओर आकर्षित किया है। आश्चर्य भी व्यक्त किया कि देश के सबसे स्वच्छ शहर में पेयजल का यह हाल क्यों है अभी नर्मदा के जल से इंदौर अपनी प्यास बुझा रहा है। नगर में ऐसी कोई प्राकृतिक बड़ी नदी नहीं है, जिसमें स्वच्छ जल प्रवाहित होता हो। ऐसे में एक बार शहर के लिए यशवंत सागर जैसे बड़े तालाब की जरूरत महसूस होने लगी है, ताकि सिर्फ नर्मदा जल के भरोसे नहीं रहा जा सके। 1928 के जल संकट से बना यशवंत सागर होलकर रियासत काल में 1905 तक इंदौर को पेयजल की आपूर्ति पिपलिया पाला, सिरपुर, लिंबोदी, बिलावली जैसे तालाबों के अलावा नगर में कई सार्वजनिक कुओं और बावड़िया से होती थी, लेकिन 1928 में उभरे जलसंकट ने यशवंत सागर तालाब के निर्माण की राह खोली और 1939 में यह विशाल तालाब नगर की पेयजल आपूर्ति का मुख्य स्रोत हो गया। भीषण जल संकट देख चुका शहर चाहे 1951-52 का वर्ष हो या 1965-66 का साल, नगर को अल्प वर्षा का सामना करना पड़ा था। भीषण जल संकट से नगर पीड़ित रहा था। 1965-66 के जल संकट ने कोई स्थाई हल खोजने की दिशा में कदम उठाने की ओर प्रेरित किया। कई योजनाओं के बाद नर्मदा जल को इंदौर लाने पर सहमति बनी। नर्मदा का जल पहाड़ों को लांघ कर नगर में लाने के लिए जनांदोलन चला। 1961 से 1971 के मध्य इंदौर में भविष्य के जलसंकट से निपटने के उपायों का मंथन हुआ, नर्मदा जल नगर में लाने के लिए शांति पूर्वक आंदोलन एक मिसाल बना। इन भगीरथी प्रयासों से नर्मदा के जल का नगर में 1978 में आगमन हो गया। समय-समय पर नगर में हुए जल संकटों के कारण नर्मदा के विभिन्न चरणों के माध्यम से जल आपूर्ति क्षमता में वृद्धि की जाती रही। तीन चरणों के बाद अब नर्मदा के चौथे चरण की तैयारियां हैं, जो नगर की पेयजल आपूर्ति करेगी। 1978 में पहले चरण के वक्त 8 लाख थी आबादी नर्मदा का जल नगर में आगमन के वक्त इंदौर नगर की जनसंख्या 8 लाख 29 हजार थी और नगर का क्षेत्रफल 113.52 वर्ग किमी था। ताजा अनुमान के अनुसार नगर की जनसंख्या अब करीब 31 लाख और क्षेत्रफल 530 वर्ग किमी है। नगर सीमा में 29 गांव भी सम्मिलित किए गए हैं। नगर के आस पास कई टाउनशिप बस गई हैं, जिन्हें नर्मदा का पानी पानी देना होगा।

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 21, 2026, 22:56 IST
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